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तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा: भ्रष्टाचार की फाइल पर आमने-सामने आए सीएम विजय और स्टालिन; खुलेगा कोई बड़ा राज?
Fri, 21 Aug 2026 04:26 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, चेन्नई।
पीटीआई, चेन्नई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 04:26 PM IST
सार
तमिलनाडु की राजनीति में यह बहस सिर्फ एक शुरुआत भर है। मुख्यमंत्री की मेज पर रखी वे तीन रहस्यमयी फाइलें आखिर किस घोटाले से जुड़ी हैं? क्या वाकई विपक्ष की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है? विधानसभा के अंदर की यह जंग अब जनता के बीच पहुंच चुकी है, जहां आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।
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उदयनिधि स्टालिन, नेता प्रतिपक्ष, तमिलनाडु
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को खुली चुनौती दी। स्टालिन ने मुख्यमंत्री से कहा कि वे अपनी मेज पर रखी भ्रष्टाचार की तीनों फाइलों को तुरंत खोलें। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन फाइलों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उदयनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी पिछली बातों से पीछे न हटें। उन्होंने पूछा कि सरकार जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों डर रही है। इस दौरान उदयनिधि की कुछ टिप्पणियों को स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने रिकॉर्ड से हटा दिया।
सरकार की सफाई और स्पीकर की हिदायत
विपक्ष के आरोपों पर मंत्री एन आनंद ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार के पास पूरे सबूत मौजूद हैं। सही समय आने पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच स्पीकर प्रभाकर ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसी बाहरी दबाव में काम नहीं करते हैं। मुख्यमंत्री अपने विवेक और प्रशासनिक क्षमता से फैसले लेते हैं। फैसले सरकारी अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक के बाद ही लिए जाते हैं। स्पीकर ने सभी विधायकों से फिल्मी संवाद और 'पंच डायलॉग' न बोलने की अपील की।
यह भी पढ़ें: थाने में राहुल गांधी का धरना: कांग्रेस नेता ने कहा- जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, यहां से नहीं हिलेंगे
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सरकारी गाड़ी लेने से डीएमके ने किया इनकार
विधानसभा में विधायकों को सरकारी गाड़ी देने के प्रस्ताव पर भी विवाद हुआ। उदयनिधि स्टालिन ने इस प्रस्ताव को साफ खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि डीएमके के सभी 59 विधायक इन सरकारी गाड़ियों को नहीं लेंगे। उदयनिधि ने राज्य के आर्थिक संकट का हवाला दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि यह सुविधा केवल गरीब विधायकों को ही मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि गाड़ी कोई लग्जरी नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए जरूरी है। यह मंत्रियों की तरह ही एक तय प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
लाइव प्रसारण पर भी छिड़ी जंग
सदन की कार्रवाई के सीधे प्रसारण को लेकर भी दोनों पक्षों में बहस हुई। उदयनिधि ने कहा कि लाइव प्रसारण से सदन का माहौल किसी रियलिटी शो जैसा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एडिटेड क्लिप्स और रील्स वायरल हो रही हैं। इससे विधानसभा की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। जवाब में मंत्री आधव अर्जुन ने सरकार के कदम को पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी सरकार का कामकाज देखने का पूरा हक है। वहीं मंत्री आनंद ने एक बुजुर्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग अब टीवी सीरियल छोड़कर विधानसभा की कार्यवाही देख रहे हैं।
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सरकार की सफाई और स्पीकर की हिदायत
विपक्ष के आरोपों पर मंत्री एन आनंद ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार के पास पूरे सबूत मौजूद हैं। सही समय आने पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच स्पीकर प्रभाकर ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसी बाहरी दबाव में काम नहीं करते हैं। मुख्यमंत्री अपने विवेक और प्रशासनिक क्षमता से फैसले लेते हैं। फैसले सरकारी अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक के बाद ही लिए जाते हैं। स्पीकर ने सभी विधायकों से फिल्मी संवाद और 'पंच डायलॉग' न बोलने की अपील की।
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सरकारी गाड़ी लेने से डीएमके ने किया इनकार
विधानसभा में विधायकों को सरकारी गाड़ी देने के प्रस्ताव पर भी विवाद हुआ। उदयनिधि स्टालिन ने इस प्रस्ताव को साफ खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि डीएमके के सभी 59 विधायक इन सरकारी गाड़ियों को नहीं लेंगे। उदयनिधि ने राज्य के आर्थिक संकट का हवाला दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि यह सुविधा केवल गरीब विधायकों को ही मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि गाड़ी कोई लग्जरी नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए जरूरी है। यह मंत्रियों की तरह ही एक तय प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
लाइव प्रसारण पर भी छिड़ी जंग
सदन की कार्रवाई के सीधे प्रसारण को लेकर भी दोनों पक्षों में बहस हुई। उदयनिधि ने कहा कि लाइव प्रसारण से सदन का माहौल किसी रियलिटी शो जैसा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एडिटेड क्लिप्स और रील्स वायरल हो रही हैं। इससे विधानसभा की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। जवाब में मंत्री आधव अर्जुन ने सरकार के कदम को पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि जनता को अपनी सरकार का कामकाज देखने का पूरा हक है। वहीं मंत्री आनंद ने एक बुजुर्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग अब टीवी सीरियल छोड़कर विधानसभा की कार्यवाही देख रहे हैं।