फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court says how forest workers of Maharashtra will save forests with a stick

सुप्रीम कोर्ट का सवाल, केवल लाठी के सहारे कानून और पर्यावरण को कैसे बचाएंगे वनकर्मी

Fri, 08 Jan 2021 10:55 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 08 Jan 2021 10:55 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court says how forest workers of Maharashtra will save forests with a stick
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में वनकर्मियों के पास अपनी सुरक्षा करने के लिए सिर्फ लाठी है, जबकि कर्नाटक में वे चप्पल पहन कर घूमते देखे जा सकते हैं। ऐसे में वे भारी मात्रा में हथियारों से लैस शिकारियों से कानून और पर्यावरण की रक्षा कैसे करेंगे।

विज्ञापन


अदालत ने हैरानी जताई कि असम में वन प्रहरी हथियारों से बखूबी लैस हैं, जबकि अन्य राज्यों में उनके पास पर्याप्त पोशाक भी नहीं है। न्यायालय ने कहा कि एक खास श्रेणी से ऊपर के अधिकारियों को शिकारियों से उनका बचाव करने के लिए हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट मुहैया करने का आदेश जारी किया जा सकता है।
विज्ञापन


प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना व न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, न्याय मित्र एडीएन राव और एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्त श्याम दीवान से उन उपायों के बारे में एक संयुक्त दलील सौंपने को कहा, जो वन संरक्षण और वन अधिकारियों तथा वन कर्मियों की जान की सुरक्षा के लिए अपनाए जा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, 'हमारा मानना है कि स्थिति गंभीर है और हमें यह नहीं समझ पा रहे हैं कि ये वन अधिकारी और वन कर्मी कैसे पर्यावरण एवं वन की सुरक्षा कर पाएंगे, जहां आमतौर पर विस्तृत क्षेत्र गैर-आबादी वाली है और शिकारी अपनी नापाक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इस स्थिति का फायदा उठाते हैं।' न्यायालय ने कहा कि शहर में पुलिस संकट के समय में मदद मांग सकती है, लेकिन वन अधिकारी शिकारियों के हमला कर देने से संकट पैदा होने पर मदद तक नहीं मांग सकते। इसलिए इसके लिए कुछ इंतजाम होना चाहिए।

सीजेआई ने एक वन क्षेत्र की अपनी हालिया यात्रा को याद करते हुए कहा, 'पिछले महीने मैं महाराष्ट्र के एक जंगल में था और देखा कि वन अधिकारी सशस्त्र तक नहीं हैं। जब उन पर हमला होगा तो वे अपनी सुरक्षा कैसे कर पाएंगे? एसजी (सॉलीसीटर जनरल), हम चाहते हैं कि आप संभावनाएं तलाशें। इन अपराधों पर रोक लगाने की जरूरत है।'


पीठ ने राव से पूछा कि ऐसी समस्या क्यों है कि कुछ राज्यों में वन अधिकारी हथियारों से लैस हैं जबकि अन्य में उनके पास पर्याप्त पोशाक तक नहीं है। राव ने कहा कि कुछ राज्यों द्वारा कोष का उपयोग नहीं करने के चलते वन अधिकारियों के पास पर्याप्त बुनियादी चीजें और सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। पीठ ने सुझाव दिया कि लकड़ी की तस्करी के जरिए तस्करों द्वारा धन शोधन करने के अपराध से निपटने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की एक अलग वन्य जीव शाखा होनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed