Supreme Court: मणिपुर में ग्राम पंचायत सदस्य कार्यकाल पूरा होने पर भी पद पर रह सकते हैं? हाईकोर्ट करेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट यह तय करेगा कि मणिपुर में जिन निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्यों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, क्या वे प्रशासनिक समिति या प्रशासक की नियुक्ति के बाद भी अपने पद पर बने रह सकते हैं या नहीं। पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को जानने के इच्छुक हैं। इस मामले में कानूनी प्रश्न पर निर्णय लेने के लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि मणिपुर में जिन निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्यों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, क्या वे प्रशासनिक समिति या प्रशासक की नियुक्ति के बाद भी अपने पद पर बने रह सकते हैं। इस बारे में हाईकोर्ट तय करेगा। जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को जानने के इच्छुक हैं। इस मामले में कानूनी प्रश्न पर निर्णय लेने के लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया जाएगा।
पीठ ने कहा कि इस मामले में विचार करने योग्य प्रश्न यह है कि क्या मणिपुर पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 22 के तहत प्रशासनिक समिति या प्रशासक की नियुक्ति की स्थिति में ग्राम पंचायत के निर्वाचित सदस्य, जिनका पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, ग्राम पंचायत के सदस्य के रूप में बने रहने के हकदार हैं या नहीं। इस पर मणिपुर सरकार के वकील ने तर्क दिया कि हिंसा के कारण राज्य में पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सके हैं।
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मामले को तीन महीने के भीतर हल करने का प्रयास करें
पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट की राय लेना चाहती है। पीठ ने कहा कि इसलिए हम गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हैं। साथ ही पीठ ने मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अपील की कि वे इस मामले को जल्द से जल्द खंडपीठ के समक्ष रखें। पीठ ने कहा कि मामले को तीन महीने के भीतर हल करने के प्रयास के साथ सुनवाई करें।
पीठ ने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन का उल्लेख किया
पीठ ने उल्लेख किया कि मणिपुर पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया गया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत के निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल के संबंध में 'समाप्त' शब्द के स्थान पर 'जारी' शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
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याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है और कहा है कि चूंकि मणिपुर में विभिन्न कारणों से पंचायत चुनाव नहीं हो सकते, इसलिए पूर्व निर्वाचित सदस्य 1994 अधिनियम की संशोधित धारा 22 (3) के अनुसार पद पर बने रहने के हकदार हैं। धारा 22 में डिप्टी कमिश्नर को छह महीने के लिए एक प्रशासनिक समिति या प्रशासक नियुक्त करने की शक्ति दी गई है, जो चुनाव की देखरेख करेगा। कानून की धारा 22 (3) के अनुसार, जब डिप्टी कमिश्नर द्वारा प्रशासनिक समिति या प्रशासक नियुक्त कर दिया जाता है, तो पहले की ग्राम पंचायत के निर्वाचित सदस्य अस्तित्व में नहीं रहेंगे।
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