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Supreme Court: हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास पेड़ों की कटाई पर रोक लागू रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
Thu, 03 Apr 2025 12:56 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 03 Apr 2025 12:56 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के नजदीक स्थित कांचा गाचाबाउली जंगल में 400 एकड़ जमीन पर पेड़ों की कटाई पर तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की सुनवाई पर कोई रोक नहीं लगाई है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे कांचा गाचीबाउली जंगल में, जहां पेड़ काटे जा रहे हैं, उस जगह का दौरा करें और अपनी रिपोर्ट पेश करें। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ही रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। हैदराबाद में हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास 400 एकड़ जमीन को राज्य सरकार कथित तौर पर विकसित कर रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के छात्र इसे लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बीते दिनों 3 अप्रैल तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया
गुरुवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष आया। पीठ ने अपने निर्देश में कहा कि 'हम तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश देते हैं कि वे कांचा गाचीबाउली जंगल में संबंधित जगह का दौरा करें, जहां पेड़ काटे जा रहे हैं और आज शाम 3.30 बजे तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करें।' पीठ ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक कांचा गाचीबाउली जंगल में कोई पेड़ नहीं काटा जाए। अब सुप्रीम कोर्ट आज शाम 3.45 बजे इस मामले पर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे तेलंगाना उच्च न्यायालय की सुनवाई पर कोई रोक नहीं लगा रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले पर आज सुनवाई करेगा।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सार्वजनिक करेंगे अपनी संपत्ति, जजों की बैठक में लिया गया अहम फैसला
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क्या है पूरा मामला
जिस 400 एकड़ जमीन से पेड़ों को काटा जा रहा है, वह राज्य सरकार की है और सरकार ने इसे तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन को आवंटित की है। तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन ने इस जमीन पर विकास के लिए बीती 30 मार्च से पेड़ों की कटाई शुरू की। जिसका हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और पर्यावरणविदों ने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह जमीन उसकी है न कि विश्वविद्यालय प्रशासन की। सरकार कानून के उल्लंघन से भी इनकार कर रही है। इसे लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय में बीती 1 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इससे शैक्षणिक सत्र का नुकसान हो रहा है।
ये भी पढ़ें- SC: बंगाल में 25000 शिक्षकों की भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार, हाईकोर्ट के आदेश में दखल से 'सुप्रीम' इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया
गुरुवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष आया। पीठ ने अपने निर्देश में कहा कि 'हम तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश देते हैं कि वे कांचा गाचीबाउली जंगल में संबंधित जगह का दौरा करें, जहां पेड़ काटे जा रहे हैं और आज शाम 3.30 बजे तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करें।' पीठ ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक कांचा गाचीबाउली जंगल में कोई पेड़ नहीं काटा जाए। अब सुप्रीम कोर्ट आज शाम 3.45 बजे इस मामले पर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे तेलंगाना उच्च न्यायालय की सुनवाई पर कोई रोक नहीं लगा रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले पर आज सुनवाई करेगा।
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क्या है पूरा मामला
जिस 400 एकड़ जमीन से पेड़ों को काटा जा रहा है, वह राज्य सरकार की है और सरकार ने इसे तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन को आवंटित की है। तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन ने इस जमीन पर विकास के लिए बीती 30 मार्च से पेड़ों की कटाई शुरू की। जिसका हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और पर्यावरणविदों ने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह जमीन उसकी है न कि विश्वविद्यालय प्रशासन की। सरकार कानून के उल्लंघन से भी इनकार कर रही है। इसे लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय में बीती 1 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इससे शैक्षणिक सत्र का नुकसान हो रहा है।
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