{"_id":"63f400a901ceaec0b009d658","slug":"supreme-court-says-hate-a-common-enemy-not-everything-amounts-to-hate-speech-2023-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नफरत ही सभी धर्मों की साझा दुश्मन, मन से इसे हटाएं, महान सभ्यता का मोल न करें कम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नफरत ही सभी धर्मों की साझा दुश्मन, मन से इसे हटाएं, महान सभ्यता का मोल न करें कम
Tue, 21 Feb 2023 04:52 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 21 Feb 2023 04:52 AM IST
सार
जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि हमारा और सभी धर्मों का एक ही साझा दुश्मन है और वह है ‘नफरत’। शीर्ष कोर्ट की पीठ ने कहा, ऐसा नहीं है कि जो कुछ भी कहा जाता है, वह नफरती भाषण है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोले गए हर शब्द को नफरती नहीं माना जा सकता। हम अपने मन से नफरत को हटा दें, फिर अंतर देखें। नफरत सभी धर्मों का साझा दुश्मन है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, देश में शाश्वत ज्ञान के साथ महान सभ्यता है, जो पूरी दुनिया में अद्वितीय है। नफरत से इसका मोल कम न करें। शीर्ष अदालत नफरती भाषण को विनियमित करने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
विज्ञापन
जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि हमारा और सभी धर्मों का एक ही साझा दुश्मन है और वह है ‘नफरत’। पीठ ने केरल निवासी शाहीन अब्दुल्ला के इस माह की शुरुआत में मुंबई में सकल हिंदू समाज की रैली में कथित रूप से दिए नफरती भाषण के खिलाफ याचिका पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या वहां कोई नफरती भाषण दिया गया था। मेहता ने कहा कि उन्हें दिए गए निर्देश के अनुसार इस तरह का कोई बयान नहीं दिया गया।
विज्ञापन
इस पर पीठ ने मामले में एक याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एम निजामुद्दीन पाशा से कहा, दो दिन पहले हमने आईपीसी की धारा 153ए और अन्य कानून के प्रावधानों के तहत एक मामले में अरविंद केजरीवाल (दिल्ली के सीएम) के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन
हर शब्द नफरती भाषण नहीं
शीर्ष कोर्ट की पीठ ने कहा, ऐसा नहीं है कि जो कुछ भी कहा जाता है, वह नफरती भाषण है। इसलिए हमें केवल इस बात से सावधान रहना होगा कि इस धारा का क्या अर्थ है, जैसा कि इस अदालत ने व्याख्या की है।
- अदालत ने यह भी कहा कि नफरती भाषण में कुछ अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाना आवश्यक होता है। धारा 153ए का आह्वान काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट के प्रावधान की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
- सुनवाई के दौरान, साॅलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि वह घटनाओं की वीडियो क्लिप के साथ-साथ दिए गए बयान भी दाखिल करेंगे। इस मामले में अब 21 मार्च को सुनवाई होगी।