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Supreme Court: 'राज्यपाल बिना राय बताए विधेयकों को नहीं रोक सकते', अदालत ने कहा- इससे गतिरोध पैदा हो सकता है
Fri, 07 Feb 2025 11:58 PM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 07 Feb 2025 11:58 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करने के दौरान की, जिसमें विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार करने पर राज्य विधानसभा और राज्यपाल के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर राज्यपाल राज्य सरकार को कोई सूचना दिए बिना विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर अपनी सहमति नहीं देते हैं तो इससे गतिरोध पैदा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि यह गतिरोध कैसे दूर होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करने के दौरान की, जिसमें विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार करने पर राज्य विधानसभा और राज्यपाल के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को केंद्रीय कानून से असहमति होने पर भी विधेयकों पर अपनी राय देने में देरी नहीं करनी चाहिए। पीठ ने राज्यपाल का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से सवाल किया कि जब राज्यपाल को किसी विधेयक में असहमति है, तो क्या उन्हें इसे राज्य सरकार के संज्ञान में नहीं लाना चाहिए?
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पीठ ने आगे कहा कि यदि राज्यपाल को विरोध की बात परेशान कर रही है, तो राज्यपाल को इसे तुरंत सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था, जो उक्त विधेयकों पर पुनर्विचार कर सकती थी। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा कि राज्यपाल को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि वह विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए क्यों भेज रहे हैं।
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पीठ ने यह की टिप्पणी
पीठ ने टिप्पणी की, 'यदि आपका मानना है कि यह विधेयक केंद्रीय कानून के विरोध से ग्रस्त है, तो आपको संदेश देना होगा। राज्यपाल को स्पष्ट करना होगा कि वह विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए क्यों भेज रहे हैं। अन्यथा, गतिरोध पैदा होगा। आप राज्य सरकार से विरोध को दूर करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यदि आप गतिरोध पैदा करते हैं, तो आपको गतिरोध को दूर करना होगा। लेकिन, गतिरोध को कौन दूर करेगा? पूर्ण गतिरोध नहीं हो सकता।'
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि सात विधेयकों पर राष्ट्रपति ने मंजूरी रोक ली थी और राज्य सरकार को निर्णय के बारे में सूचित किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति ने मंजूरी को रोकने का निर्णय लिया है, तो इसका मतलब है कि विधेयक स्वीकार नहीं किए गए हैं।
10 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखेगी पीठ
हालांकि, पीठ ने कहा कि यह प्रावधानों की सही व्याख्या नहीं हो सकती है, क्योंकि तर्क को स्वीकार करने से अनुच्छेद 200 और 201 के तहत प्रावधान निरर्थक हो जाएंगे। वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस पहलू पर विस्तार से बहस करेंगे और 10 फरवरी तक का समय मांगा। मामले को स्थगित करने वाली पीठ ने संकेत दिया कि वह दोनों पक्षों को सुनने के बाद 10 फरवरी को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रखेगी।
क्या है अनुच्छेद 200
संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने या रोकने का अधिकार देता है। राज्यपाल पुनर्विचार के लिए विधेयक को विधानमंडल को वापस भी भेज सकते हैं या उसमें बदलाव का सुझाव दे सकते हैं।