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Supreme Court: 'कूल-फैशनपरस्त ड्रग संस्कृति खतरनाक'; शीर्ष कोर्ट ने पीड़ित युवाओं के पुनर्वास का दिया निर्देश

Mon, 16 Dec 2024 09:30 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 16 Dec 2024 09:30 PM IST
सार

जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लांछन के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इस मुद्दे से निपटने के लिए खुली चर्चा की आवश्यकता है। शैक्षणिक दबाव व पारिवारिक अशांति भी इसे बढ़ावा दे रही है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो रही है।

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Supreme Court says cool and fashionable drug culture dangerous
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि नशीले पदार्थों के सेवन की लोकप्रिय संस्कृति युवाओं को खतरनाक जीवनशैली की ओर धकेल रही है। इसमें ड्रग्स के सेवन को कूल व फैशनपरस्त मानाकर सराहा जाता है। लेकिन, ऐसे युवाओं को शैतान के रूप में देखने के बजाय उनका पुनर्वास करना चाहिए। देश में मादक पदार्थों के सेवन के बारे में हमारी चिंताएं हैं। इससे होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने व हिंसा को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। पीठ ने पाकिस्तान से भारत में 500 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी के मामले में आरोपी की तरफ दाखिल जमानत याचिका पर फैसला सुनाते समय यह टिप्पणी की।

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जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लांछन के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इस मुद्दे से निपटने के लिए खुली चर्चा की आवश्यकता है। शैक्षणिक दबाव व पारिवारिक अशांति भी इसे बढ़ावा दे रही है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो रही है। साथियों का दबाव, पढ़ाई का तनाव व नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरक बनती है। किशोर भी इसका इस्तेमाल मानसिक, भावनात्मक सुकून पाने के लिए करते हैं।

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पीठ ने कहा, हम युवाओं से आग्रह करते हैं कि वे अपने निर्णय लेने की स्वायत्तता अपने हाथों में लें और साथियों के दबाव का दृढ़ता से विरोध करें। युवाओं को नशा करने वाले लोगों का अनुसरण नहीं करना चाहिए। नशीले पदार्थों के सेवन के शिकार केवल वंचित वर्ग तक ही सीमित नहीं हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े लोग भी नशे के शिकार हैं। हमें नशा करने वालों को भला-बुरा कहने के बजाय उनका पुनर्वास कराना चाहिए व उन्हें रचनाशील नागरिक बनाना चाहिए।

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 ड्रग्स तस्करी भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय
पीठ ने कहा कि ड्रग्स तस्करी व उसके दुरुपयोग का प्रभाव भारत के लिए तात्कालिक और गंभीर चिंता का विषय है। पीठ ने कहा, जबकि दुनिया बढ़ते पदार्थ उपयोग विकारों (एसयूडी) व सुलभ ड्रग्स बाजार के खतरे से जूझ रही है, इसके परिणाम सार्वजनिक स्वास्थ्य और यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर पीढ़ीगत छाप छोड़ते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस दुर्दशा के मूल कारणों को संबोधित करना राज्य की जिम्मेदारी है। भारत की युवा आबादी, खासतौर पर ड्रग्स के सेवन के प्रति संवेदनशील युवाओं को इस तरह के खतरे से बचाया व संरक्षित किया जाए।

 

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