फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court say Courts should examine the history of the accused before granting bail in any case

सुप्रीम कोर्ट : अदालतों को किसी भी मामले में आरोपी की जमानत मंजूर करने से पहले उसके इतिहास की कर लेनी चाहिए जांच

Mon, 13 Sep 2021 04:13 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 13 Sep 2021 04:13 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे यह पता लग पाएगा कि आरोपी का पुराना रिकॉर्ड खराब तो नहीं है। पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें हत्या व आपराधिक साजिश के एक आरोपी की जमानत मंजूर की गई थी।

विज्ञापन
Supreme Court say Courts should examine the history of the accused before granting bail in any case
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

अदालतों को किसी भी मामले में आरोपी की जमानत मंजूर करने से पहले उसके पुराने इतिहास की जांच कर लेनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे यह पता लग पाएगा कि आरोपी का पुराना रिकॉर्ड खराब तो नहीं है और उसके जमानत पर बाहर आने के बाद गंभीर अपराध को अंजाम देने की संभावना तो नहीं हैं।

विज्ञापन


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें हत्या व आपराधिक साजिश के एक आरोपी की जमानत मंजूर की गई थी। पीठ ने कहा, जमानत याचिका पर विचार करते समय आरोप की प्रकृति और सबूत भी अहम तथ्य होते हैं। साथ ही मामले में दोषसिद्धि होने पर मिलने वाली सजा की कठोरता भी जमानत के मुद्दे पर भारी पड़ती है।
विज्ञापन


पीठ ने अपने एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा, जमानत के लिए इनकार करके स्वतंत्रता से वंचित करने का उद्देश्य दंडात्मक नहीं होता बल्कि यह कदम न्याय के दोहरे हित के लिए होता है। पीठ ने कहा, एक प्रासंगिक तथ्य यह भी है कि हो सकता है कुछ समय की आजादी पाने के लिए अदालत से दयालुता की उम्मीद कर रहा शख्स न्याय की राह ही रोक दे। अदालत को इस संभावना पर भी ध्यान देना चाहिए कि याचिकाकर्ता गवाहों से मिलकर अभियोजन या न्याय की प्रक्रिया को दूषित कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, ऐसे में देखा गया है कि किसी व्यक्ति की जमानत पर सुनवाई करते हुए उसके पिछले इतिहास की जांच करना तर्कसंगत है ताकि यह जानकारी मिल सके कि उसका खराब रिकॉर्ड तो नहीं है। खासतौर पर ऐसा पुराना इतिहास, जो आरोपी के जमानत पर बाहर आने के बाद गंभीर अपराध को अंजाम देने का इशारा करता हो।


सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से जालंधर के थाना सदर में दर्ज एक मुकदमे में आरोपी को दी गई जमानत के फैसले को एकतरफ कर दिया। इस मामले में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302,120-बी, 201 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पीठ ने कहा, हाईकोर्ट इस मामले में आरोपी इंदरजीत सिंह को जमानत देते समय आरोप की प्रकृति और दोषसिद्धि होने पर मिलने वाली सजा की कठोरता व मौजूद सबूतों पर ध्यान देने में विफल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed