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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court said under the OTS scheme defaulter cannot seek additional time for payment citing rights

supreme court: ओटीएस योजना में और वक्त की मांग बकायेदार का अधिकार नहीं, कोर्ट ने फैसले को किया निरस्त

Sun, 06 Nov 2022 05:52 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sun, 06 Nov 2022 05:52 AM IST
सार

कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मार्च 2022 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक बकायेदार कंपनी को ओटीएस के स्वीकृत पत्र के तहत एसबीआई को ब्याज सहित शेष राशि का भुगतान करने के लिए छह हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया था।

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Supreme Court said under the OTS scheme defaulter cannot seek additional time for payment citing rights
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एकमुश्त समाधान (ओटीएस) योजना के तहत कोई बकायेदार अधिकारों का हवाला देते हुए भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि बकायेदार को अधिकार के रूप में समय विस्तार का दावा करने के लिए अपने पक्ष में कोई अधिकार स्थापित करना होगा।
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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मार्च 2022 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक बकायेदार कंपनी को ओटीएस के स्वीकृत पत्र के तहत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को ब्याज सहित शेष राशि का भुगतान करने के लिए छह हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया था। पीठ ने कहा कि ओटीएस योजना के तहत भुगतान की अवधि को फिर से तय करना और समय को विस्तारित करना ‘अनुबंध को फिर से लिखने’ जैसा होगा जो संविधान के अनुच्छेद-226 में प्रदान शक्तियों का इस्तेमाल करते समय स्वीकृत नहीं है।
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 पीठ ने कहा कि अनुबंध में कोई भी बदलाव भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा-62 के तहत आपसी सहमति से ही किया जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद-226 कुछ विशेष रिट जारी करने के हाईकोर्टों के अधिकारों से संबंधित है। पीठ ने कहा कि बकायेदार अधिकार का हवाला देते हुए यह मांग नहीं कर सकता कि उसने भले ही स्वीकृत ओटीएस योजना के तहत भुगतान नहीं किया है, फिर भी इसे अधिकार के रूप में और विस्तार दिया जाए। किसी भी गलत दावे को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। 
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