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सुप्रीम कोर्ट: त्वरित इंसाफ न मिलने से न्याय प्रशासन पर जनता के अविश्वास का खतरा, जानिए कोर्ट ऐसा क्यों कहा?
Wed, 01 Dec 2021 10:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 01 Dec 2021 10:03 PM IST
सार
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने यूएपीए की धाराओं में साढ़े नौ साल से चल रही सुनवाई पूरी नहीं होने पर 74 वर्षीय आशिम को जमानत दे दी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक 74 वर्षीय आरोपी को जमानत देते हुए बुधवार को कहा, त्वरित इंसाफ न मिलने से न्याय प्रशासन पर जनता के अविश्वास का खतरा पैदा होता है। समय पर सुनवाई पूरी नहीं होने कारण अदालतें आमतौर पर आरोपी को जमानत देने के लिए बाध्य होती हैं। क्योंकि सिर्फ सुनवाई लंबी चलने के कारण ही आरोपी बिना दोष सिद्ध हुए ही बड़ा समय कैद में काट देता है।
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जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने यूएपीए की धाराओं में साढ़े नौ साल से चल रही सुनवाई पूरी नहीं होने पर 74 वर्षीय आशिम को जमानत दे दी। पीठ ने कहा, त्वरित परीक्षण सुनिश्चित किए बिना व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुरूप नहीं है। पीठ ने साथ ही पाया कि पश्चिम बंगाल ने एनआईए के मामलों की सुनवाई के लिए सिर्फ एक विशेष कोर्ट बनाई है।
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इसके बाद पीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए और सत्र न्यायालयों को विशेष कोर्ट बनाने का निर्देश दिया। साथ ही केंद्र सरकार भी कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ परामर्श कर एनआईए कानून के लंबित मामलों में जल्द से जल्द सुनवाई पूरी कराने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है। पीठ ने अपने आदेश के प्रभावी अनुपालन के लिए इसकी प्रति पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव व कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजने का भी आदेश दिया।
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