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सुदर्शन केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रसारण से पहले पाबंदी न्यूक्लियर मिसाइल की तरह

Sat, 19 Sep 2020 06:05 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 19 Sep 2020 06:05 AM IST
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supreme court said that Banning program before broadcast like nuclear missile
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : getty

सिविल सेवा में कथित तौर पर मुस्लिम अभ्यर्थियों की घुसपैठ से संबंधित एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम के दो एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगाने के दो दिन बाद सुप्रीम कोर्ट के सुर नरम पड़ गए। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, प्रसारण पूर्व कार्यक्रम पर रोक न्यूक्लियर मिसाइल की तरह है।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, प्रसारण पूर्व रोक लगाना चरम कदम है क्योंकि यह फिसलने वाले ढलान के समान है। हम ऐसा कदम विशेष परिस्थितियों में ही उठाते हैं, मसलन लैंगिक या यौन हिंसा आदि मामलों में।
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पीठ ने कहा, चैनल इस बात पर बहस करने के लिए स्वतंत्र है कि जकात फाउंडेशन या किसी अन्य संगठन को कहां से फंडिंग हो रही है लेकिन कार्यक्रम में कुछ बयान आपत्तिजनक हैं। पीठ ने कहा, मुस्लिमों को हरी टी-शर्ट, टोपी, दाढ़ी में नहीं दिखाया जाना चाहिए।
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पीठ ने इस पर भी एतराज जताया कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान के पीछे कानून को जलते दिखाया गया है। सुदर्शन चैनल की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने पैरवी की। 

आप हलफनामा देकर बताएं 
सुप्रीम कोर्ट : हमें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि आप एनजीओ की फंडिंग की जांच करें। परेशानी तब होती है जब इस आधार पर पूरे समुदाय को सिविल सेवा में घुसपैठ बताया जाता है। इस कार्यक्रम का सार यह नजर आता है कि मुस्लिम किसी मकसद के लिए सिविल सेवा में जाना चाह रहे हैं। 

श्याम दीवान : कार्यक्रम को संपूर्णता के साथ देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट : आप हलफनामा दायर कर बताएं कि हमने जो चिंता जताई है उसे लेकर क्या प्रस्ताव देना चाहते हैं। हम निर्देश नहीं देना चाहते कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं? चैनल को खुद बताना चाहिए कि वह क्या करने के लिए तैयार है।

दंतहीन नियामक निकायक  को मजबूत करने की जरूरत
पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि नियामक निकाय दंतहीन है, उसे और मजबूत बनाने की जरूरत है। पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जानना चाहा कि सेल्फ रेगुलेशन को कैसे मजबूत कर सकते हैं। पीठ अब सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

पीठ ने कहा, जब हम मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं तो मीडिया में यह संदेश जाना चाहिए कि किसी समुदाय विशेष को निशाना नहीं बनाना चाहिए। आखिरकार हम एक देश में रहते हैं। हमें किसी समुदाय के खिलाफ नहीं होना चाहिए। हम सेंसरशिप नहीं करना चाहते। हम सेंसर बोर्ड नहीं हैं।


मनुष्य की गरिमा को संरक्षित करना भी जरूरी
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हमें पता है कि आपातकाल के दौरान क्या हुआ था। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जानकारी बिना रोकटोक के आनी चाहिए लेकिन हमें मनुष्य की गरिमा को संरक्षित करना भी जरूरी है। मनुष्य की गरिमा और फ्री स्पीच में संतुलन होना चाहिए।

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