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SC: 'जिम्मेदार आचरण जरूरी', कविता की जमानत के मामले में टिप्पणी को लेकर तेलंगाना CM को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
Mon, 02 Sep 2024 06:09 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Mon, 02 Sep 2024 06:09 PM IST
सार
शीर्ष अदालत 2015 के ‘नकद के बदले वोट’ घोटाला मामले में मुकदमे को राज्य से भोपाल स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेड्डी एक आरोपी हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से न्यायपालिका को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर सफाई मांगी। रेवंत रेड्डी ने बीआरएस नेता के. कविता को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत को राजनीतिक सौदा कहा था। कोर्ट ने राजनीतिक झगड़े को अदालत में घसीटने पर नाराजगी जताई।
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जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा
शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च पद पर बैठे लोगों से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने 2015 के नोट के बदले वोट मामले की सुनवाई के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, रेवंत रेड्डी ने अपने बयान के बाद खेद जताया था।
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अदालत के फैसले पर उठाया था सवाल
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कविता को दिल्ली शराब नीति मामले में 27 अगस्त को जमानत दी थी। अदालत ने माना था कि किसी अपराध को दोषी ठहराए जाने से पहले लंबे समय तक कैद में रहने को बिना सुनवाई के सजा नहीं बनने दिया जाना चाहिए। अदालत के फैसले के बाद तेलंगाना सीएम ने कहा था कि यह एक तथ्य है कि बीआरएस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के लिए काम किया था। ऐसी भी चर्चा है कि कविता को बीआरएस और भाजपा के बीच समझौते के कारण जमानत मिली है।
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बाद में सीएम ने मांगी थी माफी
वहीं, जब तेलंगाना सीएम के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना होने लगी तो उन्होंने तुरंत माफी भी मांग ली थी। उन्होंने कहा, 'मैं समझता हूं कि 29 अगस्त, 2024 की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मेरे हवाले से की गई टिप्पणियों से यह आभास हुआ है कि मैं माननीय न्यायालय की न्यायिक बुद्धिमत्ता पर सवाल उठा रहा हूं। मैं दोहराता हूं कि मैं न्यायिक प्रक्रिया में पूरी तरह से विश्वास रखता हूं। मैं मीडिया रिपोर्ट्स में छपे बयानों के लिए बिना शर्त खेद व्यक्त करता हूं।'
पीठ ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सुनवाई के लिए आया था। पीठ ने कहा, 'खासतौर पर जब कोई शख्स उच्च पद पर होता है तो उससे कुछ संयम बरतने की उम्मीद की जाती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालतों और वकीलों को इसमें घसीटा जा रहा है।'
क्या है पूरा मामला?
31 मई 2015 को तत्कालीन तेलुगू देशम पार्टी के रेवंत रेड्डी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने विधान परिषद चुनावों में टीडीपी उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी का समर्थन करने के लिए नामित विधायक एल्विस स्टीफेंसन को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए गिरफ्तार किया था। रेवंत रेड्डी के अलावा एसीबी ने कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। इन सभी को बाद में जमानत दे दी गई थी।
शीर्ष अदालत 2015 के ‘नकद के बदले वोट’ घोटाला मामले में मुकदमे को राज्य से भोपाल स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेड्डी एक आरोपी हैं।
जांच एजेंसी के किसी भी अधिकारी से पूछताछ नहीं की गई
बीआरएस विधायक गुंटकंदला जगदीश रेड्डी और तीन अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम ने सोमवार को सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग करते हुए कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग भी है और वह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के प्रभारी हैं। उन्होंने कहा, 'जांच एजेंसी के किसी भी अधिकारी से पूछताछ नहीं की गई है। यह गृह मंत्रालय तय करता है कि किससे पूछताछ की जानी है और किसकी नहीं।'
रेड्डी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि मामले में आधा मुकदमा पूरा हो चुका है और 25 गवाहों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है। इस पर सुंदरम ने कहा कि उनमें से कोई भी महत्वपूर्ण गवाह नहीं है और जांच अधिकारी से पूछताछ की जानी बाकी है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद का समय दिया।