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Supreme Court: एनडीपीएस मामले में निर्दोष सिद्ध होने के लिए विश्वसनीय सत्य आधार जरूरी
Wed, 20 Jul 2022 05:56 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 20 Jul 2022 05:56 AM IST
सार
शीर्ष अदालत ने कहा, सुनवाई के इस स्तर पर यह कहना सुरक्षित नहीं है कि प्रतिवादी ने सफलतापूर्वक यह दिखाया है कि मामले में उसके निर्दोष होने के लिए वाजिब आधार उपलब्ध है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज (एनडीपीएस) एक्ट के तहत आरोपी बनाया गया शख्स निर्दोष है, कोर्ट को यह भरोसा दिलाने के लिए विश्वसनीय और सत्य आधार होना जरूरी है।
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस नतीजे पर पहुंचने के लिए मामले में ऐसे तथ्य और परिस्थितियों का होना जरूरी है जो अदालत को भरोसा दिलाए कि आरोपी ऐसा अपराध नहीं कर सकता।
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पीठ ने कहा, कानून की धारा 37 की उप धारा 1 में कहे गए वाजिब आधार का अर्थ विश्वसनीय, सच्चा और ऐसा आधार है जिस पर कोर्ट भरोसा कर सके। कानून की धारा 37 ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत से संबंधित है।
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शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ड्रग्स मामले के आरोपी को दी गई जमानत के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की याचिका पर यह बात कही। हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा था कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत दर्ज स्वीकारोक्ति बयान के अलावा और कोई ठोस सुबूत नहीं है।
शीर्ष अदालत ने कहा, सुनवाई के इस स्तर पर यह कहना सुरक्षित नहीं है कि प्रतिवादी ने सफलतापूर्वक यह दिखाया है कि मामले में उसके निर्दोष होने के लिए वाजिब आधार उपलब्ध है। यह कहते हुए कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
सेवा के दौरान दिव्यांगता पर ही सैन्यकर्मी अशक्तता पेंशन का होगा हकदार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि किसी सैन्यकर्मी को तभी दिव्यांगता पेंशन मिल सकती है जब वह सेना की सेवा करते हुए दिव्यांग हुआ हो या दिव्यांगता बढ़ी हो। साथ ही शारीरिक दिव्यांगता कम से कम 20% हो।
जस्टिस अभय एस ओका और एमएम सुंदरेश की पीठ ने एक सैन्यकर्मी को दिव्यांगता पेंशन देने के सैन्य बल न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में जवान जब छुट्टी लेकर एक स्थान पर गया तो उसके दो दिन बाद वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।
पीठ ने कहा, ‘वादी को लगी चोटों और उसकी सैन्य सेवा के बीच किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है। न्यायाधिकरण ने इस पहलू की पूरी तरह से अनदेखी की है। इसलिए वादी दिव्यांग पेंशन पाने का हकदार नहीं है।