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Abortion Law: शीर्ष अदालत ने कहा- गर्भपात कानून में अविवाहित महिलाओं से भेदभाव व्यक्तिगत स्वायत्तता का उल्लंघन

Mon, 08 Aug 2022 02:54 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 08 Aug 2022 02:54 AM IST
सार

इस कानून के तहत विवाहित महिलाओं की विशेष श्रेणी, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता व दिव्यांग और नाबालिग जैसी अन्य संवेदनशील महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी समय सीमा 24 सप्ताह है, जबकि अविवाहित महिलाओं के लिए यही समय सीमा 20 सप्ताह है।

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Supreme court said discrimination against unmarried women in abortion law violates personal autonomy
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गर्भपात कानून के तहत विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच कोई भी भेदभाव, जिसमें अकेली महिला को 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ के गर्भपात की अनुमति नहीं है, महिला की व्यक्तिगत स्वायत्तता का उल्लंघन है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि वह मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट और इससे जुड़े नियमों में हस्तक्षेप करेंगे और देखेंगे कि क्या अविवाहित महिलाओं को डॉक्टरी सलाह के आधार पर 24 सप्ताह तक के गर्भ को गिराने की अनुमति दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई तरक्की को देखते हुए एमटीपी कानून और नियमों की भविष्योन्मुखी व्याख्या होनी चाहिए।

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इस कानून के तहत विवाहित महिलाओं की विशेष श्रेणी, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता व दिव्यांग और नाबालिग जैसी अन्य संवेदनशील महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी समय सीमा 24 सप्ताह है, जबकि अविवाहित महिलाओं के लिए यही समय सीमा 20 सप्ताह है। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस मामले में कोर्ट की सहायता करने के लिए कहा। मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
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संसद की भावना स्पष्ट
पीठ ने पूछा, जब कानून में अपवादों के लिए जगह है तो अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह का गर्भ डॉक्टरी सलाह पर गिराने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, संसद ने जब ‘पति’ शब्द को हटाकर ‘पार्टनर’ शब्द का प्रयोग किया तो इससे उसकी भावना स्पष्ट है। ये दिखाता है कि सांसद भी अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह के गर्भपात के दायरे में लाना चाहते हैं।
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स्वास्थ्य जोखिम एक समान
शीर्ष कोर्ट ने सवाल किया कि जब एमटीपी कानून, 1971 के तहत विवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति देने के लिए नियम बनाए गए तो इससे अविवाहित महिलाओं को बाहर क्यों रखा गया? स्वास्थ्य को जोखिम दोनों के लिए एक समान है।

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