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Supreme Court: शीर्ष अदालत ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया से अलग कबूलनामा कमजोर साक्ष्य, मजबूत सबूत जरूरी

Thu, 02 Mar 2023 05:28 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 02 Mar 2023 05:28 AM IST
सार

पीठ हत्यारोपी इंद्रजीत दास की त्रिपुरा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 302/34 (हत्या और सामान्य इरादे) व धारा 201 (साक्ष्य मिटाने के कारण) के तहत ट्रायल कोर्ट से दी गई सजा की पुष्टि करते हुए दास की अपील को खारिज कर दिया था।

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Supreme Court said Confession apart from the judicial process is weak evidence, strong evidence is necessary
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायेतर कबूलनामा एक कमजोर साक्ष्य है और इसकी पुष्टि के लिए एक मजबूत सबूत की जरूरत होती है। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ 2007 के हत्या मामले में युवक को बरी कर दिया।

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जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा, यह स्थापित किया जाना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया से अलग दिया गया कबूलनामा पूरी तरह से स्वैच्छिक और सत्य था, क्योंकि ऐसा कबूलनामा एक कमजोर साक्ष्य होता है, खासकर जब इसे सुनवाई के दौरान वापस ले लिया गया हो। इसकी पुष्टि के लिए बहुत मजबूत साक्ष्य की जरूरत होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो न्यायेतर कबूलनामे का समर्थन करता हो, बल्कि यहां तो अभियोजन पक्ष का दिया गया सबूत उसी के साथ असंगत है।
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पीठ हत्यारोपी इंद्रजीत दास की त्रिपुरा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 302/34 (हत्या और सामान्य इरादे) व धारा 201 (साक्ष्य मिटाने के कारण) के तहत ट्रायल कोर्ट से दी गई सजा की पुष्टि करते हुए दास की अपील को खारिज कर दिया था।
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पुलिस के मुताबिक दास ने कबूल की थी हत्या
पुलिस के मुताबिक, दास ने एक नाबालिग आरोपी के साथ उनके सामने कबूल किया था कि वे दोनों मृतक कौशिक सरकार की बाइक से उत्तरी त्रिपुरा जिले के फातिकरॉय और कंचनबाड़ी इलाके में गए थे। सरकार उनके साथ था। दोनों ने सरकार को चाकू से गोदकर मार डाला और उसका हेलमेट, पर्स, दो चाकू पास के जंगल में फेंक दिए। दोनों ने बताया था कि वे शव और बाइक को घसीटकर पास की नदी में ले गए और उसमें फेंक दिया। पीठ ने कहा, परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामले में मकसद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रत्यक्ष साक्ष्य के मामले में भी मकसद अहम होता है।


राजस्थान में इंटरनेट बंदी के खिलाफ याचिका पर होली के बाद सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में रीट 2023 के दौरान इंटरनेट बंद करने के खिलाफ और इंटरनेट बंदी के आदेश के कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत अब होली के बाद इस याचिका पर विचार करेगी। याचिका में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए राजस्थान में तीन दिनों तक इंटरनेट बंद करने पर सवाल उठाया गया है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बात रखी। इसमें अनुराधा भसीन मामले के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने की मांग की गई है। भसीन मामला जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने इसे तीन मार्च को सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए कहा, राजस्थान में तीन दिनों के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया था।

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