SC: दिल्ली कोचिंग सेंटर मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कहा- सभी संस्थानों के लिए एक जैसे नियम बनाए जाएं
न्यायाधीश सूर्य कांत और उज्जवल भुइयां की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि अचानक कोई घटना हो और सभी को नियमों के बारे में जानकारी हो जाए। इसलिए जरूरी है कि इस मुद्दे पर एक समान नियम तैयार किए जाएं।
विस्तार
दिल्ली में आईएएस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में तीन छात्रों की मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि देश के सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक जैसे नियम बनाए जाएं। न्यायाधीश सूर्य कांत और उज्जवल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि अचानक कोई घटना हो और सभी को नियमों के बारे में जानकारी हो जाए। इसलिए जरूरी है कि इस मुद्दे पर एक समान नियम तैयार किए जाएं।
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने शीर्ष अदालत को बताया कि कोचिंग सेंटर में अग्निशमन, शुल्क नियम, विद्यार्थी और कक्षाओं का अनुपात, विद्यार्थी शिक्षक अनुपात, सीसीटीवी, चिकित्सा सुविधा, मानसिक स्वास्थ्य और सेंटर में पढ़ने वालों को काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले में सभी राज्यों को पार्टी बनाने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने सात राज्यों की ओर से कोचिंग सेंटरों के लिए बनाए गए नियमों के बारे में अदालत को बताया, तो पीठ ने कहा कि यह नियम स्थायी होने चाहिए।
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि देश के सभी कोचिंग सेंटरों के लिए एक समान नियम बनाए जाने चाहिए। मामले में कोर्ट ने दो सप्ताह बाद सुनवाई करने के लिए कहा। इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों को निर्देश था दिया कि वे ऐसी घटनाओं को फिर से होने से रोकने के लिए नीति, विधायी और प्रशासनिक बदलावों के बारे में अदालत को अवगत कराएं।
अदालत ने कहा था कि पुराने राजेंद्र नगर जैसी घटना को रोकने के लिए पूरी राजधानी में एक समान पहल की जानी चाहिए। पीठ ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम पूरे देश में पुराने राजेंद्र नगर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्देश जारी करेंगे।'
वहीं पांच अगस्त को पीठ ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में घटी घटना सभी के लिए आंखें खोलने वाली है। अदालत ने कहा था कि ये जगहें (कोचिंग सेंटर) ‘डेथ चैंबर (मौत का कुआं)’ बन गई हैं। कोचिंग संस्थान का तब तक ऑनलाइन संचालन किया जा सकता है, जब तक वे सुरक्षा मानदंडों और गरिमापूर्ण जीवन के लिए बुनियादी मानदंडों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित न करें। कोचिंग सेंटर देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले अभ्यर्थियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।
यह है मामला
गौरतलब है कि दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में 27 जुलाई को एक बड़ा हादसा हुआ था। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली राव एकेडेमी के बेसमेंट में पानी में डूबकर तीन बच्चों की मौत हो गई। राष्ट्रीय राजधानी में 27 जुलाई की शाम अचानक हुई बारिश के कारण लाइब्रेरी में पानी भर गया था। मृतकों दो छात्र और एक छात्रा शामिल थे। तीनों यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। मृतकों की पहचान तेलंगाना निवासी तान्या सोनी, केरल निवासी नेविन डाल्विन और यूपी निवासी श्रेया यादव के रूप में हुई।
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