फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi

सुप्रीम कोर्ट ने हाथ बांध कर आलोक वर्मा को लौटाई कुर्सी, ये था सीबीआई मुखिया का पूरा विवाद

Tue, 08 Jan 2019 02:32 PM IST
पूजा मेहरोत्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा मेहरोत्रा Updated Tue, 08 Jan 2019 02:32 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
cbi - फोटो : PTI

नाक और साख की लड़ाई तो हमेशा से होती रही है लेकिन जब बात आन-बान-शान की हो तो कई परतें खुलने लग जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ सीबीआई वर्सेज सीबीआई के दो वरिष्ठों की नाक की लड़ाई में। सुप्रीम कोर्ट ने जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के मुखिया आलोक वर्मा को 8 जनवरी को बड़ी राहत दी और उन्हें उनके पद पर बहाल कर दिया।

विज्ञापन


राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा की नाक की लड़ाई बढ़ती देख केंद्र सरकार ने दोनों को ही सीबीआई से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद  सीबीआई निदेशक ने उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के मामले को संजीदगी से लिया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 

विज्ञापन

75 दिनों की लड़ाई के बाद मिली राहत

आज इस मामले में उन्हें 75 दिन बाद राहत मिली है। अदालत ने सरकार के 23 अक्तूबर को दिए आदेश को निरस्त कर दिया है। यानी उनकी पद की गरिमा बरकरार रखा गया है लेकिन उनके हांथों को बांध दिया है। अदालत ने सीवीसी जांच पूरी होने तक वर्मा कोई भी बड़ा निर्णय नहीं लेने का आदेश दिया है। सीबीआई के अतंरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के आदेश को रद्द करने के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल कर दिया है। अदालत का कहना है कि डीएसपीई अधिनियम के तहत उच्च शक्ति समिति एक हफ्ते के अंदर उनके मामले पर कार्रवाई करने का विचार करें। जब तक उच्च स्तरीय समिति आलोक वर्मा पर कोई फैसला ने ले वह कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को आलोक वर्मा को हटाने के मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता वाली चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। बता दें कि वर्मा का सीबीआई मुखिया के तौर पर कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।

क्या है पूरा मामला

Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
Rakesh Asthana-Alok Verma - फोटो : Amar Ujala

सीबीआई के दोनों वरिष्ठ अधिकारी के बीच जंग अक्तूबर 2017 से चल रही थी, जो धीरे-धीरे सुर्खियां बटोरती रही थी। लेकिन 15 अक्तूबर को आर-पार की लड़ाई में तब बदल गई जब आलोक वर्मा ने अपने दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया और अपने ही मुख्यालय में छापा मारकर एक डीएसपी को हिरासत में लिया।

मीडिया में यह खबर सुर्खियां बनी और दो अधिकारियों की नाक और साख की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई। आलोक वर्मा के खिलाफ भी जांच कमेटी बैठी और अस्थाना के खिलाफ भी। लगातार चल रही सुनवाई के बाद लगातार कोर्ट में सुनवाई चलती रही और लगातार 12 से अधिक चली सुनवाई के बाद  8 जनवरी 2019 को आलोक वर्मा को बड़ी राहत मिली है।  

पिंजरे का बंद तोता सीबीआई


यह पहली बार नहीं है जब सीबीआई पर और उनके अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हों। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की तीखी आलोचना करते हुए इसकी तुलना पिंजरे में बंद तोते से की गई थी। इसके पिछले दो प्रमुखों रंजीत सिन्हा और ए.पी. सिंह पर भ्रष्टाचार के अभियुक्त बनाए गए, लेकिन फिलहाल जो कुछ चला, उसको देखते हुए यही कहा जा सकता है कि जो बातें अतीत में सामने आईं वे तो महज छोटी-मोटी फुंसियां थीं, असली नासूर तो अब उभरा है। 

क्या कहते हैं पुराने सीबीआई निदेशक


एजेंसी के पुराने लोग नाराज और निराश हैं। सनसनीखेज मामलों की जांच करके सुर्खियां बटोरती रही सीबीआई आज खुद जांच के दायरे में है। एक के बाद एक विवाद उसकी पोल खोल रहे हैं। पूर्व सीबीआई निदेशक डी.आर. कार्तिकेयन कहते हैं, "जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है,  इससे बचा जा सकता था। 

'दोनों की नाक इतनी बड़ी हो गई जिसने 55 साल पुरानी संस्थान की साख को क्षति पहुंचाई है। दोनों की नासमझी ने अपने कैडर को बांटकर रख दिया है और ऐसी स्थिति खड़ी कर दी है कि सरकार को देश की उच्च नौकरशाही पर हावी हो जाने का मौका मिल गया।  सवाल तब और गंभीर हो जाता है जब सवाल उठा कि आखिर प्रधानमंत्री एजेंसी में चल रहे खींचतान को वक्त रहते भांपने में कैसे नाकाम रहे, जो सीधे उनके कार्यालय के तहत काम करती है। 
 

Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना - फोटो : अमर उजाला

आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना


आलोक वर्मा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के बाद दो-दो हाथ किए बिना लड़ाई छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में 24 अक्तूबर को अपनी याचिका में उन्होंने अपने अधिकार छीन लिए जाने के आदेश को सरासर निरंकुश बताया क्योंकि सीवीसी ने दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैबलिशमेंट ऐक्ट (जिस कानून के तहत सीबीआई का गठन हुआ है) के तहत प्रधानमंत्री की अगुआई में विपक्ष के नेता और प्रधान न्यायाधीश की उच्चाधिकार समिति से विचार-विमर्श नहीं किया, जिसकी सहमति एजेंसी के निदेशक के तबादले के लिए जरूरी बताई गई है।

उन्होंने कहा कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग सीबीआई के स्वतंत्र कामकाज में गंभीर दखलअंदाजी कर रहा है। वर्मा ने अस्थाना पर ऐसे फैसले लेने का आरोप भी लगाया जो बेहद संवेदनशील मामलों में जांच को प्रभावित कर रहे हैं।

दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित सीबीआई मुख्यालय की 11 मंजिला इमारत में सबसे ऊपरी मंजिल पर पिछले एक साल से तनाव का माहौल बना हुआ था। वर्मा और अस्थाना के बीच छिड़ी अघोषित जंग सबसे बड़ा रहस्य थी।

दोनों अधिकारियों में बंद थी बातचीत


दोनों अधिकारियों, जिनके दफ्तर अगल-बगल के कमरों में थे, के बीच पिछले छह महीने से बातचीत तक बंद थी। पिछले अक्तूबर में वर्मा ने अस्थाना की पदोन्नति यह कहकर रोकने की कोशिश की कि एजेंसी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है।

अस्थाना ने भी पलटवार किया और वर्मा एवं उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की लंबी फेहरिस्त पेश कर दी। सीबीआई ने 15 अक्तूबर को अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक मामले की जांच रिपोर्ट को हल्का करने के लिए तीन करोड़ रु. की घूस ली है। 

दो महीने से अपने प्रमुख की तलाश कर रही सीबीआई को पिछले साल 1 फरवरी को उसका निदेशक तब मिला जब 1987 बैच के एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, संघ शासित प्रदेश) कैडर के आइपीएस अधिकारी वर्मा को दिल्ली पुलिस आयुक्त से  सीबीआई निदेशक बनाया गया। तब अस्थाना कार्यकारी निदेशक के रूप में सीबीआई का कामकाज देख रहे थे।

राकेश अस्थाना हैं मोदी के पसंदीदा, पटेल और बोस से भी हुई तुलना


गुजरात कैडर के हाई प्रोफाइल अधिकारी अस्थाना दो बेहद संवेदनशील राजनैतिक मामलों में भी जांचकर्ता रहे थे—1997 के चारा घोटाले, जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सीधे आरोपी थे और 2002 में गोधरा ट्रेन आगजनी की घटना, जिसमें 59 लोग जिंदा जल गए थे।

अस्थाना को गुजरात में मोदी सरकार का पसंदीदा अधिकारी माना जाता था।  2013 से 2015 के बीच सूरत पुलिस आयुक्त के रूप में अस्थाना ने आसाराम बापू के खिलाफ बलात्कार और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में भूमिका निभाई और आसाराम को छोड़ने के एवज में उन्हें घूस देने की कोशिश के लिए आसाराम के बेटे नारायण साईं और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। सूरत में अस्थाना के कार्यकाल के दौरान सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में उनकी तुलना सरदार पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से की गई थी।

दिल्ली में सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक के रूप में अस्थाना, एजेंसी की उस विशेष जांच टीम (एसआईटी) का नेतृत्व कर रहे थे जो दो ऐसे मामलों की जांच कर रही थी जो एनडीए के लिए बड़े राजनीतिक मायने रखते हैं पहला, 2013 का अगस्ता वेस्टलैंड मामला जिसमें कथित रूप से कांग्रेस के बड़े नेताओं पर घूस खाने के आरोप लगे हैं और दूसरा भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ जांच का मामला है।
 

तनातनी की शुरुआत और वर्मा का अस्थाना पर आरोप

Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
सुप्रीम कोर्ट
अस्थाना और वर्मा के बीच तनातनी की शुरुआत 2017 के मध्य में तब हुई जब अस्थाना ने सीबीआई में कुछ अधिकारियों की बहाली की वर्मा की सिफारिश और कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह के रिश्तेदारों की नियुक्ति से जुड़ी सिफारिशों में पेच फंसा दिया था, तभी से दोनों के बीच रिश्ते असहज हो गए और जब पिछले साल अस्थाना की सीबीआई में विशेष निदेशक के रूप में पदोन्नति का समय आया, दोनों अधिकारियों के बीच चले आ रहे मनमुटाव ने जंग की शक्ल में बदल गई।

सीवीसी को लिखे एक पत्र में वर्मा ने अस्थाना की पदोन्नति का यह कहते हुए विरोध किया कि 5,000 करोड़ रु. के स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका की जांच की जा रही है। वर्मा ने कहा कि अस्थाना को दवा कंपनी के प्रमोटर चेतन संदेसरा और उनके परिवार से रिश्वत मिली थी। हालांकि, सीवीसी ने वर्मा की आपत्तियों को खारिज कर दिया और अस्थाना को विशेष निदेशक नियुक्त किया गया।

कब कहा गया कि सब ठीक नहीं


अस्थाना के लिए यह जीत क्षणिक थी। वर्मा, उरुग्वे के आधिकारिक दौरे पर जाने से पहले एक आदेश जारी करके गए जिसमें अस्थाना को सीवीसी की बैठक में भाग लेने से इस आधार पर रोका गया था कि स्टर्लिंग बायोटेक मामले में अब भी वे जांच के दायरे में हैं। वर्मा का यह आदेश मीडिया में लीक हो गया और चर्चा होने लगी कि सीबीआई में सब कुछ ठीक नहीं है। 

24 अगस्त को अस्थाना ने 21 पन्नों की एक शिकायत सीवीसी को सौंपी जिस पर "टॉप सीक्रेट'' अंकित था। अस्थाना ने आरोप लगाया कि वर्मा और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह उनकी छवि खराब करने के लिए असत्यापित और अप्रमाणित दस्तावेज लीक कर रहे हैं और उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए जा रहे हैं।


 किसने कब किसे घूस दिए जाने का लगाया आरोप


उस पत्र में अस्थाना ने 2017 में मांस निर्यातक मोईन कुरैशी के खिलाफ एक मामले के ऐसे कुछ बिंदुओं को उठाया जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा था (पूर्व सीबीआई प्रमुख ए.पी. सिंह भी इस मामले में सह-आरोपी हैं)।  

अस्थाना के मुताबिक, हैदराबाद के एक व्यापारी सना सतीश बाबू ने कार्रवाई से बचने के लिए वर्मा को 2 करोड़ रु. की घूस दी थी। अस्थाना का कहना है कि जब सीबीआई ने बाबू को पूछताछ के लिए बुलाया तो वर्मा ने अस्थाना से कहा कि वे बाबू से पूछताछ न करें। फिर भी अस्थाना ने जांच अधिकारी को अपनी पूछताछ जारी रखने के लिए कहा। वह सीवीसी को संबोधित अस्थाना की कम से कम पांच में से पहली शिकायत थी, जिसमें उन्होंने वर्मा और सीबीआई के संयुक्त निदेशक ए.के. शर्मा के खिलाफ एक दर्जन से अधिक आरोप लगाए।

अस्थाना ने यह भी आरोप लगाया कि वर्मा ने उन्हें केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दर्ज रेलवे से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में लालू यादव के ठिकाने पर छापेमारी से रोका था। अस्थाना ने यह भी आरोप लगाया कि एक बार वर्मा और राजेश्वर सिंह ने ईडी के एक बड़े अधिकारी को बचाने को उनसे कहा, जिसे सीबीआई ने 5 लाख रु. की रिश्वत लेते पकड़ा था।

 क्या है वो "आर" जिसका जिक्र है डायरी में


अस्थाना ने आरोप लगाया कि 2017 के मध्य से वर्मा और शर्मा मिलकर, स्टर्लिंग बायोटेक मामले में ईडी की ओर से जब्त एक डायरी की प्रविष्टियों को आधार बनाकर उनके खिलाफ मामला बनाने की कोशिशें कर रहे हैं। अस्थाना का कहना है कि उस डायरी में किसी "आर'' के नाम पर 3.8 करोड़ रु. के नकद भुगतान से जुड़ी चार एंट्री हैं। वर्मा और शर्मा द्वारा "आर'' का अर्थ "राकेश अस्थाना'' लगाकर, इसे उनके खिलाफ "साक्ष्य'' के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

हालांकि, अस्थाना ने स्वीकार किया था कि वे संदेसरा को जानते थे और उन्होंने सरकार को सूचित करने के बाद गांधीनगर स्थित अपना घर संदेसरा की कंपनी स्टर्लिंग  बायोटेक को किराए पर भी दिया था।

उनका कहना है कि जिन भुगतान के आगे "आर'' लिखा गया है उसका अर्थ दरअसल "रनिंग अकाउंट'' है न कि राकेश अस्थाना। अस्थाना के खिलाफ मामला हाल ही में तब कमजोर हो गया जब एक कंपनी ने स्वीकार किया कि डायरी में उल्लिखित रकम उसकी थी। 

यही वजह थी कि सीबीआई की एक टीम ने वडोदरा के कई होटल कारोबारियों से कड़ी पूछताछ करके यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या 2016 में वडोदरा में हुई अस्थाना की बेटी की शादी का खर्चा संदेसरा ने उठाया था। बस्सी ने इस जांच की अगुआई की थी।

अस्थाना की वास्तव में संदेसरा परिवार के साथ दोस्ती रही है और उनकी बेटी की शादी का संगीत समारोह वडोदरा के बाहरी इलाके में स्थित चेतन के फार्महाउस में ही हुआ था। हालांकि, अस्थाना ने दावा किया कि उन्होंने शादी के दौरान रात्रिभोज का उचित भुगतान किया था और उन्हें कार्यक्रम के लिए जगह "कंप्लीमेंटरी बेसिस'' पर दी गई थी।

 

अस्थाना के खिलाफ मामला

Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
राकेश अस्थाना
सना सतीश बाबू सीबीआई की नाक में दम करने के लिए लौट आए। मगर उनकी यह वापसी उस ढंग से नहीं हुई जिसका जिक्र अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखी अपनी चिट्ठी में किया है, बल्कि यह वापसी नाटकीय ढंग से अलग थी। सीबीआई की 15 अक्तूबर की एफआईआर अस्थाना पर आरोप लगाती है कि उन्होंने बाबू को हवाला मामले में बच निकलने देने के लिए 3 करोड़ रु. की घूस ली। 16 अक्तूबर को सीबीआई ने दुबई स्थित वित्तीय सेवा कंपनी क्यू कैपिटल के एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन और सीईओ मनोज प्रसाद को गिरफ्तार किया।

एफआईआर कहती है कि मनोज और दुबई में ही रहने वाले उसके भाई सोमेश ने अस्थाना को दी गई घूस में कथित तौर पर वाहक का काम किया था। सीबीआई ने 23 अक्तूबर को अपने मुख्यालय में छापे के दौरान अपने डिप्टी एसपी देवेंदर कुमार को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने उन पर वर्मा के खिलाफ अस्थाना के आरोपों की सहायता करने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

विपक्षी दल कांग्रेस ने सीबीआई के भीतर अफरा-तफरी से उपजे इस मौके को हथियाने में जरा देर नहीं की। पार्टी ने दावा किया कि वर्मा फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की 2016 की खरीद को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का मंसूबा बना रहे थे।

4 अक्तूबर को वर्मा सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा से मिले थे, जिन्होंने उन्हें राफेल सौदे की कथित अनियमितताओं की जांच करने की अर्जी सौंपी थी। वर्मा को हटाए जाने के बाद जल्दी ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री का संदेश साफ है, राफेल के नजदीक जो भी आएगा, उसे हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा। देश और संविधान खतरे में है। ''

लेकिन सीवीसी ने 23 अक्तूबर को वर्मा को जो आठ पन्नों का आदेश थमाया, उसे संजीदगी से पढऩे पर पता चलता है कि यह असल में अस्थाना की 24 अगस्त की शिकायत पर बरती गई निष्क्रियता ही थी, जिसने इस "असाधारण और उभरती हुई परिस्थिति'' में सीवीसी को कार्रवाई करने को मजबूर कर दिया।

सीवीसी के तीन नोटिसों के बावजूद वर्मा बचते रहे। वर्मा ने उस लेटर का जवाब भी नहीं दिया जो उन्हें 3 अक्तूबर को भेजा गया था और जिसमें उनसे अगले दिन सीवीसी के साथ एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए कहा गया था। अक्तूबर के शुरुआती दिनों में वर्मा ने सीवीसी की उस गुजारिश को नजरअंदाज कर दिया जिसमें उनसे 22 अक्तूबर तक अस्थाना के गोपनीय नोट पर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।  22 अक्तूबर वही तारीख थी जिस दिन सीबीआई ने खुद अपने परिसर में छापे मारे और अपने डिप्टी एसपी को गिरफ्तार किया।
 क्या असर पड़ेगा जांच पर
सीबीआई में चल रही उथल-पुथल के बीच सवाल पूछे जा रहे हैं कि इस सबका उन अहम मामलों पर क्या असर पड़ेगा जिनकी जांच-पड़ताल और देखरेख यह जांच एजेंसी कर रही है। रसूखदार लोगों से जुड़े मामलों में एयरसेल-मैक्सिस मामला शामिल है, जिसमें सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ इस साल जुलाई में आरोपपत्र दाखिल किया था।

यह मामला एफआईपीबी (विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड) की उन मंजूरियों से जुड़ा है जो चिदंबरम के वित्त मंत्री काल में कथित तौर पर आर्थिक फायदों के एवज में दी गई थीं। माल्या के प्रत्यर्पण और अगस्ता वेस्टलैंड मामलों की जांच भी अस्थाना कर रहे थे।

 

Supreme Court restrained Alok Verma AS A CBI chief All you need to know about cbi vs cbi
आलोक कुमार
एजेंसी के 7000 कर्मी सदमे में

दो वरिष्ठों की लड़ाई में जांच एजेंसी के 7,000 से ज्यादा कर्मी सदमे में हैं। वे मानते हैं कि प्रधानमंत्री ने सीबीआई के शीर्ष दो अफसरों के बीच भीतर ही भीतर खदबदा रही इस लड़ाई को इतने लंबे वक्त चलते रहने देकर गलत किया। एफआईआर में अस्थाना को प्रमुख आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है, लेकिन उन्हें मामले से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत दिखाई नहीं देता।

वर्मा के करीबी ने बताया कि "उन्हें (वर्मा को) अस्थाना के खिलाफ मजबूरन मामला दर्ज करना पड़ा वरना अस्थाना बाबू का इस्तेमाल करके उनके खिलाफ मामला दर्ज कर देते।'' हालांकि अस्थाना के करीबी एक सूत्र ने कहा, "ये डायरेक्टर और ए.के. शर्मा ही थे जिन्होंने पहले तोप चलाई और स्टर्लिंग बायोटेक मामले में अस्थाना को बुक करने की कोशिश करके उनके खिलाफ प्रताड़ित करने का खेल शुरू किया। ''

सरकार की अनदेखी का लगा है आरोप

दोनों वरिष्ठों की लड़ाई पर जानकार सीधा आरोप सरकार की अनदेखी बता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एजेंसी अंतर्कलह  से तार-तार हो रही थी और सरकार चुपचाप देखती रही। प्रधानमंत्री मोदी, शाह और उनके अफसरशाहों ने सुधार के कदम उठाने के बजाए हालात को बिगड़ने दिया। इसमें शाह की भी नाकामी नजर आती है क्योंकि सियासी तौर पर संवेदनशील एजेंसियों में नियुक्तियों पर वे प्रधानमंत्री को सलाह देते हैं।

एक बड़े अफसर कहते हैं, "अगर पीएमओ ने तीनों अफसरों को एक साथ बुलाया होता और उन्हें भविष्य में एक दूसरे की जड़ें खोदने के खिलाफ आगाह किया होता, साथ ही प्रधानमंत्री खुद उन्हें निजी चेतावनी देते, तो यह नौबत नहीं आती। हालांकि, राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री के पसंदीदा, गोधरा एसआईटी के लिए मशहूर गुजरात कैडर के अफसर सीबीआई में नंबर दो पायदान पर नियुक्त कर दिए गए और वे अब घूस लेते पकड़े गए। प्रधानमंत्री के तहत सीबीआई सियासी दुश्मनी साधने का हथियार बन गई है। यह खुद लड़ाई में फंसकर गर्त में जा रही है।''

हालांकि कुछ पूर्व पुलिस अधिकारी सीबीआई की गिरावट की जड़ें 1990 के दशक के मध्य तक खोजते हैं जब एजेंसी लगातार ज्यादा से ज्यादा सियासी रंगत में ढलती गई और 2013 का साल आते-आते उसने सुप्रीम कोर्ट से पिंजरे के तोते का खिताब हासिल कर लिया था।

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के पूर्व डायरेक्टर जनरल एन.आर. वासन कहते हैं, "सीबीआई इस मुकाम पर इसलिए आ पहुंची है क्योंकि विनीत नारायण हवाला मामले के बाद इसमें अफसरों को लाने का गलत तंत्र शुरू किया गया।

'' नारायण मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर सीवीसी देखरेख का भी निर्देश दिया। वासन कहते हैं, "इसके नतीजतन सीबीआई के भीतर कम से कम तीन आपस में झगड़ते धड़ों के भद्दे बंटवारे और खींचतान की नींव पड़ी।''

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व सदस्य अजय अग्निहोत्री के मुताबिक, "राज्यों और केंद्र के तमाम खुफिया और जांच संगठनों को बिल्कुल अमेरिकी प्रणाली की तरह ही विधायिका के अधिकार क्षेत्र में ले आना चाहिए। अफसरशाही की निगरानी का काम अफसरशाही पर छोड़ देना ही मौजूदा गड़बड़झाले की वजह है।''

सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर शांतनु सेन कहते हैं कि सड़ांध 2000 में शुरू हुई जब एजेंसी ने अफसरों की सीधी भर्ती बंद कर दी। वे यह भी बताते हैं, "लाल बहादुर शास्त्री और एजेंसी के संस्थापक डायरेक्टर डी.पी. कोहली ने सीबीआई की परिकल्पना एक ऐसी एजेंसी के तौर पर की थी जो सीधी भर्ती से आए अफसरों की रीढ़ से बनी हो और ये अफसर जांचकर्ता के तौर पर प्रशिक्षित हों, और सियासी दबावों का डटकर मुकाबला कर सकें।'' यही वे खूबियां हैं जिन्हें लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।सीबीआई राजनैतिक रूप से संवेदनशील मामलों की भी जांच कर रही है

आईआरसीटीसी घोटालाः लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि रेल मंत्री के रूप में (2004-09) उन्होंने होटलों के आवंटन में कथित रूप से अनियमितताएं बरतीं। अस्थाना ने आरोप लगाया है कि निदेशक वर्मा इस जांच में हस्तक्षेप कर रहे थे।

स्थितिः आरोपपत्र दाखिल हो चुका है; दिल्ली की एक अदालत ने लालू एवं पांच अन्य लोगों को 5 अक्तूबर को जमानत दे दी

वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटालाः इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने 3,600 करोड़ रु. की इस डील को अपनी झोली में डालने के लिए कथित रूप से कांग्रेस के नेताओं, नौकरशाहों और भारतीय वायु सेना के अधिकारियों को घूस दी

स्थितिः वायु सेना के पूर्व प्रमुख एस.पी. त्यागी को गिरफ्तार किया गया, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात से इस सौदे के प्रमुख बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का प्रत्यर्पण अटका हुआ है

कोयला घोटालाः 2004-09 के बीच अवैध रूप से कोयले के ब्लॉक आवंटन के कारण 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ

स्थितिः पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को चार मामलों में दोषी पाया गया था

एयरसेल-मैक्सिस घोटालाः पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति पर मैक्सिस की ओर से एयरसेल के अधिग्रहण में नियमों का उल्लंघन करने और मनी लांडरिंग के आरोप लगे हैं

स्थितिः 1 अक्तूबर को दिल्ली की एक अदालत ने चिदंबरम पर मुकदमा चलाने की अनुमति के लिए सीबीआई को सात हफ्ते का समय दिया है। ईडी ने चिदंबरम समेत आठ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, 2010: सुरेश कलमाडी के नेतृत्व वाली खेल आयोजन समिति ने कथित रूप से 70,000 करोड़ रु. की हेराफेरी की

स्थितिः कलमाडी जमानत पर बाहर हैं। कुछ अधिकारियों को सजा हुई है


विजया माल्या कर्ज बकायाः माल्या ने 20 बैंकों के करीब 9,000 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण चुकाने में हेर-फेर की है

स्थितिः माल्या ब्रिटेन की अदालत में प्रत्यर्पण कार्यवाही का सामना कर रहा है; 10 दिसंबर को इस पर फैसला आने की उम्मीद. अस्थाना जांच कर रहे थे कि माल्या के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर को घटाने में किसकी भूमिका थी

पंजाब नेशनल बैंक घोटालाः नीरव मोदी और उसके साथी मेहुल चोकसी ने बैंक को 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लगाई

स्थितिः मुंबई की एक अदालत में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं

शारदा और रोज वैली घोटालेः पश्चिम बंगाल के दो बड़े चिटफंड घोटाले

स्थितिः इसमें गिरक्रतार होने वालों में राज्य के खेल मंत्री मदन मित्रा, टीएमसी सांसद कुणाल घोष, शृंजॉय बोस और पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार शामिल हैं। पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी और ममता बनर्जी पर भी उंगलियां उठीं. जांच का जायजा लेने के लिए अस्थाना हाल में बंगाल गए थे।

रॉबर्ट वाड्रा और बीएस हुड्डा मामलेः हरियाणा के मानेसर में 1,500 करोड़ रु. के जमीन के सौदे में भ्रष्टाचार हुआ। राजस्थान के बीकानेर में हुए एक अन्य भूमि घोटाले में राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा का नाम आया।

स्थितिः मानेसर सौदे में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा और 33 अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई है. बीकानेर मामले में वाड्रा की कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

चूके हुए निशाने

कुछ जाने-माने मामले जिनमें सीबीआई आरोपियों का जुर्म साबित करने में नाकाम रही

एयरसेल-मैक्सिस

साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से इस बात की जांच करने के लिए कहा कि क्या उस वक्त टेलीकॉम मंत्री दयानिधि मारन ने मलेशिया की कंपनी मैन्न्सिस के हाथों एयरसेल के अधिग्रहण में रिश्वत हासिल किए थे

मौजूदा स्थिति

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2017 में मंत्री, उनके भाई कलानिधि मारन और कई अन्यों के खिलाफ सभी आरोप रद्द कर दिए

जैन हवाला घोटाला

हवाला कारोबारी एस.के. जैन की लिखी एक डायरी से पता चला कि 1988 से 1991 के बीच एल.के. आडवाणी और शरद यादव सहित शीर्ष सियासतदानों को कुल 65 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नकदी में घूस दी गई थी

मौजूदा स्थिति

सभी आरोपी कोर्ट से छूटे; इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी को सीबीआई के कामकाज की देखरेख करने के निर्देश दिए

आरुषि-हेमराज हत्या

तेरह बरस की आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज 2008 में नोएडा के एक फ्लैट में मृत पाए गए थे। उनकी हत्या की गई थी. सीबीआई ने उसके माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार, के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया

मौजूदा स्थिति

अक्तूबर 2017 में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दंपती को बरी कर दिया।  इस साल मार्च में सीबीआई ने उनकी रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी


2जी स्पेक्ट्रम

सीबीआई निजी कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में यूपीए सरकार की कथित अनियमितताओं की जांच कर रही थी। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोटाले से सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ की चपत लगी थी

मौजूदा स्थिति

एक ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर, 2017 में सभी आरोपियों को बरी किया, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा भी शामिल थे. इस साल मार्च में सीबीआई ने दिल्ली हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

बोफोर्स

अप्रैल, 1987 में एक स्वीडिश रेडियो चैनल ने आरोप लगाया कि स्वीडिश हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स ने भारतीय सेना को 400 होवित्जर तोपों की सप्लाई करने का 1,437 करोड़ रु. का ठेका हासिल करने के लिए भारतीय सियासतदानों और रक्षा कर्मियों को घूस दी थी। इस स्कैंडल ने राजीव गांधी सरकार को हिलाकर रख दिया. सीबीआई ने तब बोफोर्स के प्रेसिडेंट, कथित बिचैलिये विन चड्ढा, इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोक्कि और लंदन में रहने वाले हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया


मौजूदा स्थिति

दिल्ली हाइकोर्ट ने 2005 में एबी बोफोर्स, चड्ढा और हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ आरोप रद्द कर दिए। इस साल फरवरी में सीबीआई ने हाइकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है


बेल्लारी में अवैध खनन

यह मामला कथित तौर पर 40 करोड़ रु. की घूस से जुड़ा था। सीबीआई ने 2015 में आरोपपत्र दाखिल किया जिसमें कहा गया कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येद्दियुरप्पा के परिवार के ट्रस्ट को मुख्यमंत्री के उनके कार्यकाल के दौरान खनन के लाइसेंस सहित दूसरी पक्षपातपूर्ण मदद देने के लिए कथित तौर पर 20 करोड़ रु. का भुगतान किया गया


मौजूदा स्थिति

सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्तूबर, 2016 में येद्दियुरप्पा और 13 अन्य को बरी कर दिया


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed