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घर खरीदारों से धोखाधड़ी: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लगाई फटकार, कहा- जांच में देरी से बढ़ रही लोगों की मुसीबत

Wed, 11 Mar 2026 08:32 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 11 Mar 2026 08:32 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों से धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर और बैंक की मिलीभगत की जांच में देरी खरीदारों का दुख बढ़ा रही है। अदालत ने सीबीआई को सभी मामलों की जांच करने और दोषी बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई करने का सख्त आदेश दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों में घर खरीदारों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बैंकों और बिल्डरों के बीच अपवित्र गठजोड़ की जांच में देरी हो रही है। इस देरी की वजह से उन लोगों की मुसीबतें और बढ़ रही हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई घर खरीदने में लगाई थी।
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कोर्ट ने जताई नाराजगी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सीबीआई के उस सुझाव पर नाराजगी जताई, जिसमें कुछ मामलों को राज्य की एजेंसियों को सौंपने की बात कही गई थी। कोर्ट ने इस मांग को ठुकरा दिया। बेंच ने आदेश दिया कि सीबीआई ही सभी मामलों की जांच करे और शुरुआती पूछताछ को नियमित केस में बदले।
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अदालत ने सख्त लहजे में कहा, "हम जांच पूरी होने के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं कर सकते। जांच खींचने से उन खरीदारों का दर्द बढ़ेगा, जिन्हें बिल्डरों और बैंकों ने मिलकर परेशान किया है।" यह मामला 1,200 से ज्यादा घर खरीदारों की याचिकाओं से जुड़ा है। इन लोगों ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम जैसे इलाकों में 'सबवेंशन स्कीम' के तहत घर बुक किए थे।
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क्या है पूरा मामला?
सबवेंशन स्कीम के तहत बैंक लोन की रकम सीधे बिल्डर के खाते में भेज देते हैं। नियम के मुताबिक, जब तक खरीदार को घर का कब्जा नहीं मिल जाता, तब तक लोन की किस्त (ईएमआई) बिल्डर को भरनी होती है। लेकिन बिल्डरों ने किस्त देना बंद कर दिया। इसके बाद बैंकों ने खरीदारों पर पैसा चुकाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जबकि उन्हें अब तक घर नहीं मिला है।


बैंक अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
सुप्रीम कोर्ट इस बात से भी नाराज दिखा कि सीबीआई ने अब तक बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की है। कोर्ट ने कहा कि अगर सीबीआई के पास स्टाफ की कमी है, तो वह राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) से मदद ले सकती है और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लयू) के अधिकारियों को शामिल कर सकती है।

कोर्ट ने सीबीआई के एक जिम्मेदार अधिकारी को अगली सुनवाई तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। इसमें जांच की रफ्तार और इसे पूरा करने की समय सीमा बतानी होगी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सुपरटेक लिमिटेड जैसे बिल्डरों और कॉर्पोरेशन बैंक जैसे संस्थानों की भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए।

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