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SC Update: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के टॉप अधिकारियों को जेल से किया रिहा; अब्दुल्ला आजम की याचिका पर होगी सुनवाई

Thu, 20 Apr 2023 09:59 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 20 Apr 2023 09:59 PM IST
सार

हाईकोर्ट के इन निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अधिकारियों को राहत देते हुए उन्हें हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग के टॉप अधिकारियों को राहत देते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों पर स्टे लगा दिया है, जिसके तहत अधिकारियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। 

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क्या है मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें प्रस्ताव दिया गया था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों की सुविधाओं में बढ़ोतरी की जाए। प्रस्ताव में रिटायर्ड जजों को घर के कामकाज के लिए घरेलू सहायक देने की मांग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार अप्रैल को अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे। हालांकि हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के वित्त सचिव एस एम ए रिजवी और विशेष सचिव (वित्त) सरयू प्रसाद मिश्रा पर कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए दोनों अधिकारियों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया था। 
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हाईकोर्ट के इन निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अधिकारियों को राहत देते हुए उन्हें हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट अब शुक्रवार को इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा। 
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अब्दुल्ला आजम की याचिका पर होगी सुनवाई
विरोध प्रदर्शन मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में अब्दुल्ला आजम ने मांग की है इलाहाबाद होईकोर्ट द्वारा धरना प्रदर्शन मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाने पर रोक लगे। अब सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करेगा। बता दें कि 29 जनवरी 2008 को मुरादाबाद के छजलैट में पुलिस चेकिंग के दौरान जब पुलिस ने सपा नेता अब्दुला आजम की कार को चेकिंग के लिए रोका तो अब्दुल्ला आजम वहीं धरने पर बैठ गए थे। इस पर पुलिस ने अब्दुल्ला आजम और कई अन्य सपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया है और दो साल की सजा सुनाई है। 

सुप्रीम कोर्ट ने राशन कार्ड उपलब्ध कराने की समय सीमा तीन महीने बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने की समय सीमा तीन महीने और बढ़ा दी है। बता दें कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत मजदूरों को यह लाभ मिलेगा। जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह आदेश दिया है। इस आदेश के बाद प्रवासी मजदूर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन आदि की सुविधा ले सकेंगे।  

अंजलानी भारद्वाज, हर्ष मंदेर और जगदीप छोकर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड देने की मांग की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया। याचिका में कहा गया कि ऐसा नहीं हैं कि हम कह रहे हैं कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असमर्थ रही है लेकिन अभी भी कुछ लापरवाही है और कई लोग अभी भी छूट गए हैं, ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को देखना चाहिए कि सभी को राशन कार्ड मिले। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पुराने आदेश में कहा था कि सरकार प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड देने से मना नहीं कर सकती। 

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत 
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहा है। जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह राहत दी। बेंच ने कहा, मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोप पत्र दायर किया जाना भी बाकी है। याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ऐसी शिकायत भी नहीं है कि जब भी उसे बुलाया गया हो उसने जांच में हिस्सा न लिया हो। अभी स्थिति यह है तो हमारे पास अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने वाले आदेश को बदलने का कोई कारण नहीं है। 

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने का उसका 16 दिसंबर, 2022 का अंतरिम आदेश जांच पूरी होने तक लागू रहेगा, बशर्ते याचिकाकर्ता आगे की जांच में लगन से भाग ले। व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की विभिन्न धाराओं के तहत 2021 में दर्ज प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया था। आरोपी की ओर से पेश हुए वकील नमित सक्सेना ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी होने के नाते कथित अपराध के समय ड्यूटी पर था।

पूर्व मंत्री की हत्या में वाईएसआरसी सांसद को मिली अंतरिम संरक्षण के खिलाफ सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या मामले में वाईएसआरसी कांग्रेस के लोकसभा सांसद वाईएस अविनाश रेड्डी को 25 अप्रैल तक गिरफ्तारी से संरक्षण को चुनौती वाली अपील पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सनसनीखेज हत्या के मामले में नेता को अंतरिम अग्रिम जमानत देने पर वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा की दलीलों पर गौर किया। 

पीठ ने कहा, हम इस मामले को कल (शुक्रवार) को सुनेंगे। हालांकि शुरूआत में पीठ ने इस मामले को 28 अप्रैल को सूचीबद्ध करने की बात कही थी। तब लूथरा ने बताया कि हाईकोर्ट वाईएस अविनाश रेड्डी की अग्रिम जमानत याचिका पर विस्तृत आदेश पारित करने वाला है। अगर जमानत दी जाती हे तो याचिका निरर्थक हो जाएगी। उन्होंने कहा, यह एक बहुत ही अनूठा मामला है जहां आरोपी विधायक के राजनीतिक संरक्षण के चलते जांच को आंध्र प्रदेश से तेलंगाना के हैदराबाद में स्थानांतरित कर दिया गया। वह वर्तमान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी संबंधित हैं। इसके बाद पीठ ने कहा, तब फिर हम इसे कल ही सुनेंगे।

ईडी निदेशक के कार्यकाल विस्तार को चुनौती वाली याचिका पर 3 मई को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने वाले केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 3 मई तक स्थगित कर दी। जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की पीठ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई को आगे के लिए स्थगित करने की अपील की। उन्होंने बताया कि वह समलैंगिकों के विवाह को मंजूरी देने के मामले में संविधान पीठ की सुनवाई के सिलसिले में व्यस्त हैं।

इस पर पीठ ने कहा, सॉलिसिटर जनरल आप कोई वैकल्पिक व्यवस्था करें। हम इस तरह मामले को आगे नहीं बढ़ा सकते। हम नहीं चाहते कि ऐसी कोई धारणा बने कि सरकार गैरजरूरी देरी कर रही है। मेहता ने कहा, किसी ने नहीं यह अनुमान नहीं लगाया था कि संविधान पीठ का मामला इस तारीख से टकरायेगा। सॉलिसिटर जनरल की अपील पर पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 मई तय कर दी।

शीर्ष अदालत ने पहले केंद्र की इस दलील से असहमति जताई थी कि संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि वे गंभीर धन शोधन के आरोपों का सामना कर रही राजनीतिक संस्थाओं ने दायर की हैं। पीठ ने कहा था कि भले ही याचिकाकर्ताओं पर मामले हैं लेकिन उन्हें भी अपनी समस्याओं के निवारण के लिए न्यायपालिका का रुख करने का अधिकार है।

उपहार सिनेमा अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 1997 के उपहार अग्निकांड मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी आमोद कंठ के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी नहीं मिलने पर निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस केएम जोसेफ, बीवी नागरत्ना और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने कंठ के खिलाफ समन जारी कर गलती की है।

पीठ ने कहा, इस मामले को देखने से हमें पता चलता है कि मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 197 की मांगों के विपरीत अपीलकर्ता के खिलाफ संज्ञान लेकर इस मामले के तथ्यों में गलती की है। अकेले इस छोटे से आधार पर (मंजूरी की कमी के कारण) अपीलकर्ता (आमोद कंठ) सफल हुए। उनकी अपील स्वीकार की जाती है और आक्षेपित आदेश को रद्द किया जाता है।

जीडीआर धोखाधड़ी मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट को जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने 318 करोड़ रुपये की ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट्स (जीडीआर) धोखाधड़ी मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए गए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) संजय रघुनाथ अग्रवाल को गुरुवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने कहा कि प्राथमिकी में कोई अंतिम रिपोर्ट दायर नहीं की गई है और याचिकाकर्ता को लगातार जेल में रखना उचित नहीं होगा।

पीठ ने कहा, जमानत के लिए उपयुक्त शर्तें लागू करते समय प्रवर्तन निदेशालय की इस चिंता को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि याचिकाकर्ता के भागने का डर है और अगर उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह देश से बाहर जा सकता है। शीर्ष अदालत ने हैदराबाद स्थित नामपल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा लागू की जाने वाली शर्तों के अनुसार अग्रवाल को जमानत दे दी। न्यायालय ने अग्रवाल को निर्देश दिया कि वह विशेष अदालत के समक्ष अपना पासपोर्ट जमा कराएं और ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने पर नियमित रूप से उसके सामने पेश हों।

 

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