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मामलों की लिस्टिंग में पक्षपात के आरोप वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
Mon, 06 Jul 2020 05:32 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rohit Ojha
Updated Mon, 06 Jul 2020 05:32 PM IST
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supreme court
- फोटो : ANI
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मामलों की लिस्टिंग में पक्षपात का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एसए नजीर की पीठ ने ऐसी याचिका दाखिल करने के लिए रीपल कंसल पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिकाओं का चलन बन गया है। रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी याचिकाकर्ताओं और वकीलों के फायदे के लिए दिन-रात काम करते हैं।
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तकनीकी समस्या के चलते पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपना फैसला नहीं सुनाया। बेंच ने फोन पर अपने फैसले के बारे में जानकारी दी। न्यायालय ने साफ कर दिया कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है। कंसल ने अपनी याचिका में कहा था कि उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्री अधिकारी मामलों की लिस्टिंग के दौरान प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकार्ताओं को अधिक महत्व देते हैं।
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याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि, जब मुश्किल समय में वर्चुअल कोर्ट चल रही है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे कि वो प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकर्ताओं के मामलों की लिस्टिंग को प्राथमिकता ना दें।
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साथ ही इस बात की भी मांग की गई थी कि रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों से कहा जाए कि वो साधारण वकीलों और याचिकाकर्ताओं के मामलों में बिना वजह की खामी ना निकालें। इसके अलावा अतिरिक्त कोर्ट फीस और अन्य शुल्क वापस किए जाएं। बेंच ने 19 जून को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।