{"_id":"602181fb8ebc3ed2873822c2","slug":"supreme-court-rejects-centers-decision-not-to-reduce-cut-off-marks-for-bds-syllabus","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीडीएस में दाखिले के लिए परसेंटाइल में 10 फीसदी कटौती का ‘सुप्रीम’ निर्णय","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बीडीएस में दाखिले के लिए परसेंटाइल में 10 फीसदी कटौती का ‘सुप्रीम’ निर्णय
Tue, 09 Feb 2021 05:17 AM IST
Kuldeep Singh
राजीव सिन्हा, अमर उजाला
राजीव सिन्हा, अमर उजाला
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 09 Feb 2021 05:17 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अकादमी सत्र 2020-21 के लिए देशभर के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में बीडीएस में दाखिले के लिए निर्धारित परसेंटाइल में 10 फीसदी कम करने का आदेश दिया है। बीडीएस कोर्स में कट ऑफ अधिक होने के कारण देशभर के विभिन्न कालेजों में करीब 7000 सीटें खाली पड़ी थीं।
विज्ञापन
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने नीट-2020 की परीक्षा में शामिल हुए छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए बीडीएस कोर्स के प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए हर श्रेणी के छात्रों के लिए परसेंटाइल में 10 फीसदी कम करने का निर्देश दिया है। पीठ ने परसेंटाइल न कम करने के 30 दिसंबर 2020 के केंद्र सरकार के फैसले को दरकिनार कर दिया है।
विज्ञापन
पीठ ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि परसेंटाइल कम करने से डेंटल कोर्स का स्टैंडर्ड कम हो जाएगा। पीठ ने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि पहले से ही काफी डेंटिस्ट हैं, ऐसे में सीटें खाली रह जाए तो भी हानि नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि पिछले वर्ष भी बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए परसेंटाइल को कम किया गया था।
विज्ञापन
पीठ ने कहा, नीट-2020 परीक्षा में सामान्य श्रेणी में 40 फीसदी परसेंटाइल और एससी/एसटी, ओबीसी में 30 फीसदी परसेंटाइल लाने वाले छात्रों को बीडीएस में दाखिले पर विचार किया जाना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने निजी मेडिकल कालेज से फीस में कमी करने पर भी विचार करने को कहा है ताकि छात्र दाखिला ले सकें। दरअसल सरकार ने दलील दी थी कि निजी कालेजों में सीटें खाली रहने की एक वजह अधिक फीस भी है। गौरतलब है कि खाली पड़ीं 7000 सीटों में से महज 265 सीटें सरकारी कालेज में हैं शेष सभी निजी कॉलेजों में हैं।