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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: क्या अपने परिवार को मिलावटी चीजें खिलाने को तैयार हैं, जमानत देने से किया इनकार
Wed, 09 Jun 2021 03:52 AM IST
Jeet Kumar
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 09 Jun 2021 03:52 AM IST
सार
आरोपी के वकील नहीं दे पाए जवाब तो पीठ ने कहा, इसका मतलब यह समझा जाए कि बाकी लोग मरें तो मरें, हम परेशान क्यों
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खाद्य पदार्थों में मिलावट के एक मामले की सुनवाई के दौरान मिलावटखोर आरोपियों को यह कहकर अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया कि क्या वे अपने परिवार को मिलावटी खानपान की चीजें खिलाने को तैयार है, जो ग्राहकों को खिलाया जा रहा है।
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जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह बात दो आरोपियों प्रवर गोयल और विनीत गोयल की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। आरोपियों के वकील ने जब यह कहा कि मामले के तथ्यों के कारण उनके मुवक्किलों को जमानत मिलनी चाहिए।
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इस पर पीठ ने वकील से कहा, क्या आप या आपका परिवार यह खाना खाएंगे? अगर आपका जवाब हां में है तो हम जमानत देने पर विचार करेंगे। वकील द्वारा इस सवाल का जवाब देने में देरी किए जाने पर पीठ ने कहा, इन मामलों में जमानत मांगने वाले वकील के लिए इस तरह के एक बुनियादी सवाल का जवाब देना मुश्किल क्यों होना चाहिए। इसका मतलब यह क्यों नहीं समझा जाना चाहिए कि बाकी लोगों को मरने दो। हमें क्यों परेशान होना चाहिए?
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सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा, स्वास्थ्य से संबंधित अपराधों के मामले में हमारा देश बहुत उदार हैं। यह कहते हुए पीठ ने कहा कि हम दोनों आरोपियों को जमानत देने से पक्ष में नहीं हैं। कोर्ट का रुख देखते हुए वकील ने याचिका वापस ले ली।
आरोपियों के वकील ने पहले यह दी थी दलील
आरोपी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से इस आधार पर अग्रिम जमानत की मांग की कि खाद्य अपमिश्रण से संबंधित अधिकांश आरोप जमानती हैं, ऐसे में उनके मुवक्किलों को हिरासत में लेने का कोई औचित्य नहीं है। वकील ने कहा, केवल धोखाधड़ी का आरोप गैर-जमानती है, लेकिन प्राथमिकी के अनुसार ऐसा कोई अपराध नहीं बनाया गया।
यह था मामला: गेहूं को पॉलिश करके बेच रहे थे आरोपी
मध्य प्रदेश के नीमच में पिछले साल दर्ज इस मुकदमे में दोनों पर आरोप है कि वे गेहूं को अखाद्य सुनहरे रंग का उपयोग कर और उन्हें पॉलिश करके बेच रहे थे। दिसंबर, 2020 को छापे के बाद उनके परिसर से कई हजार किलो पॉलिश किए गए गेहूं की बोरियां जब्त की गईं। दोनों पर भारतीय दंड संहिता के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट और हानिकारक खाद्य पदार्थ बेचने का मुकदमा दर्ज किया गया था।
खानपान की चीजों में मिलावट समाज के खिलाफ अपराध
बीते हफ्ते खाद्य पदार्थों में मिलावट के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को यह कहते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था कि खाद्य पदार्थो में मिलावट पूरे समाज के खिलाफ अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से कहा था कि आप नकली खाद्य पदार्थ बेचकर न केवल एक व्यक्ति, बल्कि पूरे समाज को मारने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के अपराधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। यह मामला मिलावटी घी का था। आरोपी की दलील थी कि घी खाने के लिए नहीं थी, बल्कि वह मंदिरों में दीपक जलाने के लिए थी।