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जबरन धर्म परिवर्तन: सुप्रीम कोर्ट का मामले में दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार, कहा- इससे बिगड़ सकता है धार्मिक सौहार्द
Fri, 25 Mar 2022 03:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 25 Mar 2022 03:05 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस तरह की याचिका से सिर्फ सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। बेंच ने कहा कि इस याचिका को एक कीमत के साथ रद्द किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें जबरन धर्म परिवर्तन के मुद्दे को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह एक प्रचार हित याचिका ज्यादा लग रही है और इस तरह की याचिकाओं से धार्मिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा रहता है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस तरह की याचिका से सिर्फ सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। बेंच ने कहा कि इस याचिका को एक कीमत के साथ रद्द किया जाएगा। हालांकि, इस पर याचिकाकर्ता की वकील सीआर जया सुकीन ने कहा कि वह खुद ही याचिका को वापस लेना चाहती हैं। बाद में कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई को रद्द करते हुए इसे वापस लेने की मांग मंजूर कर ली।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के पिछले साल मार्च में एक जनहित याचिका पर सुनाए गए फैसले को चुनौती दी थी। दरअसल, तब हाईकोर्ट से मांग की गई थी कि वह इसाई मिशनरीज की ओर से किए जा रहे जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने और उस पर निगरानी के लिए केंद्र और तमिलनाडु सरकार को बोर्ड का गठन करने का निर्देश दे।
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इस मामले पर हाईकोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा था कि तमिलनाडु सरकार के पास पहले से ही जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून है। इसके जरिए जबरन धर्म परिवर्तन के अलावा गलत तरीके से कराए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ भी सुरक्षा मिलती है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ यह उम्मीद और भरोसा कर सकते हैं कि इस मामले में आधिकारिक जवाब देने वाले कानून का पालन कर रहे होंगे। याचिका का जवाब देने वाले (सरकार) चाहे तो इसे लेकर नियम भी बना सकते हैं। इसी के साथ कोर्ट ने मामले में रिट याचिका का निपटान कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस तरह की याचिका से सिर्फ सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। बेंच ने कहा कि इस याचिका को एक कीमत के साथ रद्द किया जाएगा। हालांकि, इस पर याचिकाकर्ता की वकील सीआर जया सुकीन ने कहा कि वह खुद ही याचिका को वापस लेना चाहती हैं। बाद में कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई को रद्द करते हुए इसे वापस लेने की मांग मंजूर कर ली।
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क्या था मामला?
याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के पिछले साल मार्च में एक जनहित याचिका पर सुनाए गए फैसले को चुनौती दी थी। दरअसल, तब हाईकोर्ट से मांग की गई थी कि वह इसाई मिशनरीज की ओर से किए जा रहे जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने और उस पर निगरानी के लिए केंद्र और तमिलनाडु सरकार को बोर्ड का गठन करने का निर्देश दे।
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इस मामले पर हाईकोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा था कि तमिलनाडु सरकार के पास पहले से ही जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून है। इसके जरिए जबरन धर्म परिवर्तन के अलावा गलत तरीके से कराए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ भी सुरक्षा मिलती है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ यह उम्मीद और भरोसा कर सकते हैं कि इस मामले में आधिकारिक जवाब देने वाले कानून का पालन कर रहे होंगे। याचिका का जवाब देने वाले (सरकार) चाहे तो इसे लेकर नियम भी बना सकते हैं। इसी के साथ कोर्ट ने मामले में रिट याचिका का निपटान कर दिया।