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‘एक देश एक पाठ्यक्रम’ की मांग वाली याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
Fri, 17 Jul 2020 03:04 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 17 Jul 2020 03:04 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिसमें छह से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए ‘एक देश एक पाठ्यक्रम’ या ‘एक देश एक शिक्षा बोर्ड’ की मांग की गई थी। याचिका भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि यह नीतिगत मामला है, लिहाजा अदालत द्वारा इसमें दखल देने का कोई कारण नहीं बनता। पीठ ने कहा कि हम अनुच्छेद-32 के तहत इस पर विचार नहीं कर सकते।
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इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्हें इस बात की इजाजत दी जाए कि वह इस बारे में सरकार की संबंधित अथॉरिटी के सामने प्रतिवेदन दे सकें। इस पर पीठ ने कहा कि आप सरकार को कोई भी प्रतिवेदन देने के लिए स्वतंत्र हैं, इसके लिए अदालत की इजाजत की जरूरत नहीं है।
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आप बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ाना चाहते हैं : कोर्ट
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से कहा गया कि बच्चों को मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, राज्य के नीति निर्देशक तत्वों आदि भारतीय संविधान की मूल चीजें पढ़ाई जानी चाहिए। इस पर पीठ ने उपाध्याय से कहा कि कोरोना काल में ऐसे ही बच्चों का बोझ कम करने की कोशिश की जा रही है और आप बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ाना चाह रहे हैं।