{"_id":"5f495ef82dbcee5b121acbfc","slug":"supreme-court-refused-to-stay-on-bindas-bol-program-of-sudarshan-tv","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ पर प्रसारण से पहले रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ पर प्रसारण से पहले रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
Sat, 29 Aug 2020 01:16 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 29 Aug 2020 01:16 AM IST
विज्ञापन
supreme court
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ पर प्रसारण से पहले प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। हाल ही में जारी कार्यक्रम के प्रोमो में सरकारी सेवा में कथित तौर पर मुस्लिमों की घुसपैठ की साजिश पर बड़ा खुलासा करने का दावा किया गया है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, हमें प्रतिबंध लगाने से पहले गंभीरता के हर पहलू को देखना होगा। निर्णय लेने से पहले सभी संभावित परिणामों को देखना होगा। पीठ ने आगे कहा, हम 49 सेकंड की क्लिप के असत्यापित प्रतिलेख पर पूर्व प्रसारण पर रोक नहीं लगा सकते। वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरणों को ऐसी शक्तियां हैं जिनसे वे सामाजिक सद्भाव और समुदायों के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कानून के तहत सुनिश्चित कर सकते हैं।
साथ ही पीठ ने प्रसारण रोकने की याचिका पर केंद्र, भारतीय प्रेस परिषद, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन और सुदर्शन न्यूज को नोटिस जारी कर 15 सितंबर को अगली सुनवाई तक जवाब मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा, हमें प्रतिबंध लगाने से पहले गंभीरता के हर पहलू को देखना होगा। निर्णय लेने से पहले सभी संभावित परिणामों को देखना होगा। पीठ ने आगे कहा, हम 49 सेकंड की क्लिप के असत्यापित प्रतिलेख पर पूर्व प्रसारण पर रोक नहीं लगा सकते। वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरणों को ऐसी शक्तियां हैं जिनसे वे सामाजिक सद्भाव और समुदायों के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कानून के तहत सुनिश्चित कर सकते हैं।
विज्ञापन
साथ ही पीठ ने प्रसारण रोकने की याचिका पर केंद्र, भारतीय प्रेस परिषद, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन और सुदर्शन न्यूज को नोटिस जारी कर 15 सितंबर को अगली सुनवाई तक जवाब मांगा है।
विज्ञापन