कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु को झटका, SC का सुनवाई से इनकार
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बता दें कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच का कावेरी जल विवाद पिछले साल इतना बढ़ा था कि तमिलनाडु सरकार को पानी की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा था। पिछले दिनों पानी की मांग को लेकर तमिलनाडु सरकार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक सरकार उसे पूरा पानी नहीं दे रही थी। इस साल एकबार फिर तमिलनाडु सरकार ने 63TMC पानी की मांगको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन न्यायालय ने सुनवाई करने से मना कर दिया है।
Cauvery water issue: Supreme Court refused to entertain Tamil Nadu government's application seeking release of 63 tmc of water in Cauvery river from Karnataka for this year
— ANI (@ANI) November 21, 2017
क्या है कावेरी जल विवाद
इसके बेसिन में कर्नाटक का 32 हजार वर्ग किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल है। कर्नाटक और तमिलनाडु, दोनों ही राज्यों का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है और इसे लेकर दशकों के उनके बीच लड़ाई जारी है। बारिश की कमी की शिकायत के साथ कर्नाटक सरकार बीच-बीच में पानी बंद करती रही है जिससे तमिलनाडु में सूखे जैसा हालात उत्पन्न हो जाता है।
पिछले साल सितंबर में तमिलनाडु सरकार ने विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को आदेश दिया था कि वह कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु के लिए भी रिलीज करे। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह तमिलनाडु को 10 दिनों के अंदर 15000 क्यूसेक पानी सप्लाई करे ताकि वहां के किसानों को राहत मिल सके।
हर राज्य इसके पानी पर अपना अधिक अधिकार चाहता है
2 कावेरी जल विवाद करीब 100 साल पुराना है। अंग्रेजी राज में यह विवाद मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर रियासत के बीच था। बाद में एक समझौता हुआ।
3 1924 में मद्रास और मैसूर के बीच समझौता हुआ लेकिन बाद में केरल और पुद्दुचेरी भी इस विवाद में आ गए क्योंकि नदीं इन राज्यों से भी होकर बहती है।
4 -1972 में एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आई। इसके आधार पर 1976 में चारों राज्यों के बीच एक समझौता हो गया। लेकिन किसी भी राज्य ने इसका पालन नहीं किया ।
5 1986 में तमिलनाडु ने केंद्र सरकार से इस विवाद के निपटारे के लिए न्यायिक आयोग बनाए जाने की मांग की।
6- तमिलनाडु के किसानों की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आयोग बनाने का निर्देश दिया।
7- आखिरकार 1990 में न्यायिक आयोग बनाया गया जिसने 2007 में अपना फैसला दिया।
8- फैसले के बाद भी विवाद नहीं निपटा और कोई न कोई पक्ष नाराज ही रहा।
9- मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अब कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया है।