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सुप्रीम कोर्ट ने कहा : अग्रिम जमानत से इनकार और लंबे समय तक गिरफ्तारी से राहत, ऐसा आदेश नहीं देना चाहिए

Fri, 28 May 2021 11:06 PM IST
योगेश साहू राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 28 May 2021 11:06 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन दो आदेशों के आलोक में की है, जिनमें आरोपियों की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी लेकिन उन्हें 90 दिनों के लिए गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई थी। 

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Supreme Court : Refusal of anticipatory bail but relief from prolonged arrest, said such order should not be given
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालतों को अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते समय आरोपी को गिरफ्तारी से राहत नहीं देनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि इस तरह का निर्देश विवेक (विशेषाधिकार) से ऊपर है और न्यायिक उदारता के समान है, जो अदालतों के पास नहीं है। 

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चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि अग्रिम जमानत देने की अदालत की विवेकाधीन शक्ति का इस्तेमाल अबाधित (बिना रोकटोक के) तरीके के नहीं किया जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अदालत को वैधानिक योजना को ध्यान में रखना चाहिए। इस तरह के आदेश में आरोपियों के हितों का कम ख्याल रखना चाहिए। उसे समाज और जांच एजेंसी की चिंताओं को ध्यान में रखना चाहिए। इस तरह का आदेश तार्किक होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ असाधारण परिस्थितियों में हाईकोर्ट कुछ समय के लिए आरोपी की संरक्षण प्रदान कर सकता है, भले ही जांच एजेंसी के पास आरोपी को गिरफ्तार करने की वाजिब वजह हो।

ये कहते हुए शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित उन दो आदेशों को दरकिनार कर दिया है, जिनमें आरोपियों की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी लेकिन उन्हें 90 दिनों के लिए गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई थी। 


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट ने आरोपियों को इस तरह की सुरक्षा प्रदान कर एक गंभीर त्रुटि की। अदालत ने कहा कि वास्तव में इन आदेशों का प्रभाव यह है कि आरोपियों को अग्रिम जमानत का हकदार नहीं पाया गया। वहीं उन्हें लंबे समय तक उसे गिरफ्तारी से राहत भी मिल गई। यानी, इस अवधि के दौरान आरोपी दंडात्मक कार्रवाई के भय के बगैर घूम सकता है।

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