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Supreme Court: 'दो से अधिक संतान तो सरकारी नौकरी नहीं... राजस्थान सरकार का नियम बरकरार'; अदालत ने कही यह बात
Thu, 29 Feb 2024 06:59 AM IST
ज्योति भास्कर
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 29 Feb 2024 06:59 AM IST
सार
दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलने के बारे में एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। राजस्थान सरकार के नियम के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस नियम के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें दो से अधिक बच्चे होने पर उम्मीदवार को सार्वजनिक नौकरी से वंचित कर दिया गया था। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कुछ इसी तरह का प्रावधान (जिसे पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्रता शर्त के रूप में पेश किया गया था) को इस अदालत ने 2003 में एक मामले में बरकरार रखा था।
राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
पीठ ने बताया कि इस अदालत ने तब माना था कि वर्गीकरण, जो दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करता है, गैर-भेदभावपूर्ण और संविधान के दायरे में है, क्योंकि प्रावधान के पीछे का उद्देश्य परिवार नियोजन को बढ़ावा देना है। शीर्ष अदालत ने 12 अक्तूबर 2022 के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पूर्व सैनिक रामजी लाल जाट की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि नियम नीति के दायरे में आता है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
पूर्व सैनिकों के नियम के हवाले को भी कोर्ट ने नहीं माना
अपीलकर्ता ने पूर्व सैनिकों के समायोजन के संबंध में नियमों का हवाला दिया जहां दो से अधिक बच्चे न होने की शर्त निर्दिष्ट नहीं की गई है। अदालत ने कहा, ऐसी दलील भी अपीलकर्ता के मामले को आगे नहीं बढ़ाती है। पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद है कि अपीलकर्ता ने राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया था और ऐसी भर्ती राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 से शासित होती है।
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यह है मामला
31 जनवरी, 2017 को रक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त होने के बाद जाट ने 25 मई, 2018 को राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन किया। उनकी उम्मीदवारी को राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 के नियम 24(4) के आलोक में इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि चूंकि 1 जून 2002 के बाद उनके दो से अधिक बच्चे थे, इसलिए वह राजस्थान विभिन्न सेवा (संशोधन) नियम, 2001 के अनुसार सार्वजनिक रोजगार के लिए अयोग्य थे। नियमों के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा, जिसके 1 जून 2002 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हों।
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राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
पीठ ने बताया कि इस अदालत ने तब माना था कि वर्गीकरण, जो दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करता है, गैर-भेदभावपूर्ण और संविधान के दायरे में है, क्योंकि प्रावधान के पीछे का उद्देश्य परिवार नियोजन को बढ़ावा देना है। शीर्ष अदालत ने 12 अक्तूबर 2022 के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पूर्व सैनिक रामजी लाल जाट की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि नियम नीति के दायरे में आता है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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पूर्व सैनिकों के नियम के हवाले को भी कोर्ट ने नहीं माना
अपीलकर्ता ने पूर्व सैनिकों के समायोजन के संबंध में नियमों का हवाला दिया जहां दो से अधिक बच्चे न होने की शर्त निर्दिष्ट नहीं की गई है। अदालत ने कहा, ऐसी दलील भी अपीलकर्ता के मामले को आगे नहीं बढ़ाती है। पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद है कि अपीलकर्ता ने राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया था और ऐसी भर्ती राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 से शासित होती है।
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यह है मामला
31 जनवरी, 2017 को रक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त होने के बाद जाट ने 25 मई, 2018 को राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन किया। उनकी उम्मीदवारी को राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 के नियम 24(4) के आलोक में इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि चूंकि 1 जून 2002 के बाद उनके दो से अधिक बच्चे थे, इसलिए वह राजस्थान विभिन्न सेवा (संशोधन) नियम, 2001 के अनुसार सार्वजनिक रोजगार के लिए अयोग्य थे। नियमों के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा, जिसके 1 जून 2002 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हों।