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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Questions Posting of 56 IPS Officers in CAPFs, Seeks Affidavits from Home and DoPT Secretaries

CAPF में कैसे आए 56 IPS?: अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, गृह/डीओपीटी के सचिव 3 सप्ताह में देंगे शपथ पत्र

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 28 Jul 2026 09:52 PM IST
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Supreme Court Questions Posting of 56 IPS Officers in CAPFs, Seeks Affidavits from Home and DoPT Secretaries
आईपीएस - फोटो : एएनआई

पदोन्नति एवं वित्तीय मामले में पिछड़ रहे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों को 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत हासिल हुई थी। जब तय अवधि में इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो सेवानिवृत्त कैडर अधिकारियों ने दिसंबर 2025 में केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर दी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस उज्जल भुइयां और अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने इस केस में सख्त रुख अपनाते हुए गृह मंत्रालय और डीओपीटी के सचिव को तीन सप्ताह में शपथ पत्र देने के लिए कहा है। 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, उसे लागू करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। उसकी प्रगति रिपोर्ट को लेकर शपथ पत्र दिया जाए। इसमें यह बात भी शामिल रहे कि 23 मई 2025 के बाद से लेकर अब तक 56 आईपीएस 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) लेवल पर बतौर प्रतिनियुक्ति केंद्रीय बलों में कैसे आ गए। इस मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। 

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केस में सरकारी पक्ष के वकीलों ने अतिरिक्त समय मांगा
महेंद्र सिंह देव बनाम गोविंद मोहन, अवमानना के इस मामले में कैडर अफसरों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा, सरकार ने यह स्वीकार किया था कि ये कैडर अफसर 'ओजीएएस' में आते हैं। पदोन्नति में आए ठहराव के मद्देनजर सरकार को छह माह में सेवा नियम और भर्ती नियमों की समीक्षा करने के लिए कहा गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस केस में शपथ पत्र दिया, लेकिन डीओपीटी ने नहीं दिया। इसके अलावा विभिन्न केंद्रीय बलों के डीजी भी शपथ पत्र नहीं दे सके। इस केस में सरकारी पक्ष के वकीलों ने अतिरिक्त समय मांगा। 
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उन्होंने जानकारी दी कि अब विभिन्न बलों का डेटा आ गया है। कैडर अफसरों के वकील ने बताया कि सरकार के रिव्यू पिटीशन को सर्वोच्च अदालत ने अक्तूबर 2025 में डिसमिस कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अभी तक कैडर अफसरों का रिव्यू तो लिया ही नहीं गया। इस दौरान केंद्रीय बलों में 56 आईपीएस भी आ गए और सरकार ने सीएपीएफ एक्ट भी पास करा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केस में अभी तक क्या प्रगति हुई है, यह बताया जाए। 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कौन से कदम उठाए गए हैं, अवमानना केस की अगली सुनवाई से पहले यह जानकारी दी जाए।  
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सर्वोच्च अदालत ने 23 मई 2025 को अपने फैसले में कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'ओजीएएस पैटर्न' लागू किया जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी। हालांकि इस फैसले के बाद केंद्रीय बलों में डीआईजी के पदों पर आईपीएस की नियुक्ति बढ़ती चली गई। 


बता दें कि 28 अक्तूबर 2025 को सर्वोच्च अदालत में कैडर अधिकारियों को 'सुप्रीम' जीत मिली थी। सर्वोच्च अदालत द्वारा रिव्यू पिटीशन को डिसमिस किए जाने के बाद केंद्र सरकार को तगड़ा झटका लगा। इससे पहले कैडर अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में जीत हासिल हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार, उस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन में चली गई। पूर्व चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गवई के स्थान पर जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस उज्जल भुइयां के साथ मिलकर इस मामले की सुनवाई की। सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को यह डर सता रहा था कि रिव्यू पिटीशन डिसमिस होने के बाद सरकार उन्हें पदोन्नति एवं आर्थिक फायदे देगी या नहीं। वजह, इससे पहले भी कैडर अधिकारी, सर्वोच्च अदालत में जीत हासिल कर चुके थे, लेकिन उन्हें पदोन्नति में फायदा नहीं मिला। इस साल सरकार ने सीएपीएफ बिल पास करा लिया था, जिसका कैडर अधिकारियों ने विरोध किया था। 

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