फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court questions Centre over transcripts of videos in Sonam Wangchuk detention case

Supreme Court: 'AI के दौर में अनुवाद में सटीकता होना जरूरी', वांगचुक के वीडियो ट्रांसक्रिप्ट पर 'सुप्रीम' सवाल

Mon, 16 Feb 2026 07:55 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 16 Feb 2026 07:55 PM IST
सार

सोनम वांगचुक के मामले में केंद्र सरकार की तरफ से प्रस्तुत किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट की सटीकता पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि एआई के जमाने में अनुवाद में कम से कम 98% सटीकता होनी चाहिए।

विज्ञापन
Supreme Court questions Centre over transcripts of videos in Sonam Wangchuk detention case
सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं सोनम वांगचुक की पत्नी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछे। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जो वांगचुक के मामले में जो वीडियो जमा किए गए हैं उनके सही ट्रांसक्रिप्ट (शब्द-दर-शब्द रिकॉर्ड) कहां हैं। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बहुत विकसित हो गया है, ट्रांसलेशन में कम से कम 98% सटीकता होनी चाहिए।

विज्ञापन


कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि वांगचुक के बयान का असली ट्रांसक्रिप्ट सरकार से चाहिए। इस मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने कोर्ट को बताया कि कुछ बातें जो सरकार ने वांगचुक के नाम पर लिखी हैं, वह उन्होंने कभी नहीं कहीं। अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- India-AI Summit: तन्मय माहेश्वरी ने कहा- हर तकनीक के अच्छे-बुरे पहलू होते हैं, लेकिन एआई किसी की जगह नहीं लेगा
विज्ञापन
विज्ञापन


सही ट्रांसलेशन पेश करने का दिया आदेश
कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि आपके पास वीडिया काअसली ट्रांसक्रिप्ट हो। आप जो कह रहे हैं और वांगचुक ने जो कहा है, दोनों अलग हैं। हम यह तय करेंगे। कम से कम जो वांगचुक ने कहा, उसका सही अनुवाद होना चाहिए। इस मामले में सिबल ने ट्रांसलेशन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वांगचुक अपनी हड़ताल जारी रखते रहे और युवाओं को उकसाने के लिए नेपाल का जिक्र करते रहें।  उन्होंने कहा कि यह लाइन कहां से आई? अडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट बनाने का अलग विभाग है और वे इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं।

वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र का जवाब
बता दें कि केंद्र सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वांगचुक की हिरासत के दौरान 24 बार मेडिकल जांच की गई और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत का कारण अभी भी मौजूद है, इसलिए उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हमने उनकी सेहत का बार-बार परीक्षण किया। वह फिट और स्वस्थ हैं। उन्हें पाचन संबंधी थोड़ी दिक्कत थी, उसका इलाज किया जा रहा है। चिंता की कोई बात नहीं है। हिरासत के आदेश के कारण अभी भी मौजूद हैं।


ये भी पढ़ें:- JEE Main Result: जेईई मेंस के नतीजे घोषित, 96.26% अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, 12 ने हासिल किए पूरे-पूरे अंक

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत मामला
दरअसल वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने कहा कि वांगचुक की एनएसए, 1980 के तहत हिरासत अवैध है। गौरतलब है कि एनएसए के तहत केंद्र और राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति को तब तक हिरासत में रख सकते हैं जब तक वह भारत की रक्षा के लिए खतरा हो।

इस कानून के तहत अधिकतम हिरासत की अवधि 12 महीने तक हो सकती है, लेकिन इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है। अंगमो ने कोर्ट में कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक जिम्मेदार नहीं हैं। वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि यह उनके पांच साल के शांतिपूर्ण प्रयासों के लिए दुखद है।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed