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रेप केस:आरोपी के 'भइया इज बैक' वाले होर्डिंग पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, आरोपी के वकील को सुनाई खरी-खोटी

Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
सार

बलात्कार के मामले में नाराज उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बचाव पक्ष के वकील से कहा कि 'अपने भैया से इस सप्ताह सावधान रहने को कहें।' 

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Supreme Court questions 'celebratory hoarding' for rape accused after bail from Madhya Pradesh High Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को मध्य प्रदेश में शादी के नाम पर रेप के आरोपी को जमानत के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत के बाद छूटे बलात्कार के आरोपी के लिए 'जश्न मनाने वाली होर्डिंग' पर सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में जमानत पर छूटे आरोपी के पोस्टर 'भइया इज बैक' पर सवाल उठाए। नाराज उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बचाव पक्ष के वकील से कहा कि 'अपने भैया से इस सप्ताह सावधान रहने को कहें।' 

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सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की पीठ को पीड़िता के वकील ने बताया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से जमानत के बाद इलाके में जश्न मनाते हुए एक बैनर लगाया गया, जिसमें लिखा है कि  'भइया इज बैक'। इस पर पीठ जिसमें जस्टिस कृष्णा मुरारी और हेमा कोहली भी शामिल हैं, ने आरोपी के वकील से कहा कि जमानत के बाद आप क्या मना रहे हैं? जस्टिस हेमा कोहली ने कहा कि ये 'भैया इज बैक' क्या है। कोर्ट ने आगे पूछा कि आपने किस मौके पर होर्डिंग लगाई। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि संभवत: आरोपी को जमानत मिलने के बाद होर्डिंग लगाई गई थी।
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इस दौरान जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा कि 'अपने भैया को इस सप्ताह सावधान रहने के लिए कहें.' इस मामले में पीठ ने 18 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए तारीख दी है।
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दरअसल, पीड़िता महिला ने प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे शादी का झूठा वादा कर तीन साल तक कई मौकों पर उसके साथ यौन संबंध बनाए। इसके बाद उसने शादी करने से इंकार कर दिया। महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी को पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया गया था। 


इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत दे दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि पूरी सुनवाई अवधि के दौरान आरोपी को हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।  वहीं, आरोपी ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उसके बीच आपसी सहमति से संबंध थे। जिसके बाद महिला ने सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका दाखिल की थी।

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