सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- NRI पेशनरों को कैसे करेंगे आधार से लिंक
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केंद्र सरकार ने आधार मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि आधार का डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है। कोर्ट ने केंद्र के उस निर्णय पर सवाल उठाया है जिसमें आधार को पेंशन से जोड़ा जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि आधार कोई सब्सिडी नहीं है बल्कि यह किसी शख्स द्वारा सालों की सेवा के बाद मिलने वाली राशि है। याचिकाकर्ताओं के तर्क का हवाला देते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एके सीकरी, एएम खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण की पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि कैसे केंद्र आधार ना होने पर पेंशन को रोक सकता है। वेणुगोपाल ने दलील दी कि इसके जरिए फर्जी पेंशनभोगियों को रोका जा सकता है।
जस्टिस सीकरी ने कहा- पेंशन एक पात्रता है और यह सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत कोई लाभ नहीं है। इसे कैसे आधार एक्ट 2017 के अनुच्छेद सात के साथ जोड़ा जा सकता है। पेंशन सेवा के बदले मिलने वाला लाभ है। ऐसे बहुत से पेंशनर हैं जो अपने बच्चों के साथ विदेश में रह रहे हैं। उन श्रेणी के लोगों को यह कैसे कहा जा सकता है कि जब तक आपके पास आधार नहीं है आपको पेंशन नहीं दी जा सकती? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा- दूसरी श्रेणी में वह व्यक्ति शामिल हैं जो अल्जाइमर या गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे बहुत से वृद्ध लोग मौजूद हैं जिनका बायोमैट्रिक आधार डाटा से नहीं मिलता है। वे कहां जाएंगे? पेंशन एक हक है और राज्य द्वारा दिए जाने वाला कोई इनाम नहीं। सरकार को इस मामले में उपाय करने चाहिए।
कोर्ट ने कहा- ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें मजदूरों के बायोमैट्रिक डाटा मेल नहीं होते हैं। वहीं सुदूर क्षेत्रों में बिजली या नेटवर्क ना होने की वजह से प्रमाणीकरण विफल हो जाता है। ऐसे में क्या लाभार्थी को आर्थिक लाभ से वंचित कर दिया जाएगा? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि सरकार आगे आकर बताएगी कि कैसे वह वित्तीय बहिष्करण के गंभीर मुद्दों का हल निकालेगी तो हम उसकी सराहना करेंगे। सरकार को यह बताना होगा कि वह कैसे लाभार्थियों को उनके हक से वंचित ना होने देने के लिए कदम उठाती है।