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SC: आत्मस्वीकृति और घर से शव बरामदगी के बावजूद मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार-आरोपी से जवाब तलब

Tue, 25 Nov 2025 01:35 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 25 Nov 2025 01:35 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज हत्या मामले में आत्मस्वीकृति और घर से शव मिलने के बावजूद आरोपी को मिली जमानत पर यूपी सरकार और आरोपी को नोटिस जारी किया।

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Supreme Court Question Bail Despite Confession and Body Recovery, Seek Response from UP Government and Accused
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

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प्रयागराज में हत्या के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हस्तक्षेप करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्य आरोपी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह आदेश तब दिया जब उसे बताया गया कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्वयं गला घोंटकर हत्या करने की बात स्वीकार की थी। शव भी उसके ही घर से बरामद हुआ था, बावजूद इसके इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने पीड़िता की मां की याचिका पर अधिवक्ता राजेश जी. इनामदार और शाशवत आनंद की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार और आरोपी आशीष गौतम उर्फ अरविंद कुमार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका के अनुसार, 35 वर्षीय राजकेसर चौधरी की हत्या के मामले में आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने जूट की रस्सी से गला घोंटकर हत्या की और शव को अपने नव-निर्मित घर के सेप्टिक टैंक में छिपा दिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने वहीं से सड़ी-गली लाश बरामद की, जिसकी पहचान परिजनों और स्वतंत्र गवाहों ने की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना और अन्य कारण बताया गया है, जो स्पष्ट रूप से हत्या की पुष्टि करता है।

हाईकोर्ट ने सितंबर में दी थी जमानत
याचिका के अनुसार, 2 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने आरोपी को लंबी हिरासत, धीमी ट्रायल प्रक्रिया और जेलों में भीड़ का हवाला देते हुए जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने इसमें आर्थिक अपराधों से संबंधित फैसलों का हवाला भी दिया। इसकी आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया कि यह हत्या जैसे जघन्य अपराधों के संदर्भ में बिल्कुल अनुपयुक्त था।

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मां ने लगाया तथ्यों की अनदेखी का आरोप
पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने जगजीत सिंह बनाम आशीष मिश्रा के निर्णय का उल्लंघन किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पीड़ित पक्ष को हर चरण पर सुना जाना अनिवार्य है। याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को कानूनी रूप से विकृत और तथ्यों की अनदेखी करने वाला बताया गया है। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य और आरोपी से पूछा कि ऐसे भयावह और प्रमाणिक साक्ष्यों वाले केस में जमानत देने की परिस्थितियां क्या थीं? मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

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