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संभल हिंसा मामला: आरोपी मुल्ला अफरोज पर लगा एनएसए सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

Tue, 29 Sep 2026 11:58 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 29 Sep 2026 11:58 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की एनएसए के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कबूलनामा अकेले हिरासत का आधार नहीं हो सकता। इसके साथ ही, गैरकानूनी हिरासत आदेश के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

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Supreme Court quashes NSA charges against accused Mulla Afroz Sambhal violence case imposes fine UP government
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी का कबूलनामा उसे नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत हिरासत में रखने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मुल्ला अफरोज की 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने क्या कहा? 
कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी को अन्य संबंधित परिस्थितियों पर भी विचार करना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि अफरोज के मामले में अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।
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राज्य सरकार पर कितना जुर्माना लगाया? 
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अक्तूबर 2025 में संभल में 2024 की सांप्रदायिक हिंसा में कथित भूमिका के लिए मुल्ला अफरोज के खिलाफ सख्त 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (एनएसए) लागू किया था। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' का आदेश पारित करने के लिए सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस दत्ता ने अपने लॉ क्लर्क को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका निधन उनके 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले हो गया था।
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एनएसए क्या है? 
एनएसए केंद्र और राज्यों को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है जो 'भारत की सुरक्षा के खिलाफ' काम कर सकते हैं। हिरासत की अधिकतम अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी खत्म किया जा सकता है। एनएसए को स्थानीय प्रशासन लागू कर सकता है। इसे हाईकोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाले बोर्ड से मंजूरी मिलनी जरूरी है। चूंकि यह 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' है, न कि गिरफ्तारी, इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।


क्या है पूरा मामला? 
संभल में नवंबर 2024 में तनाव तब बढ़ गया, जब वहां शाही जामा मस्जिद का कोर्ट के आदेश पर सर्वे किया जा रहा था। यह सर्वे इस दावे के बाद किया जा रहा था कि उस जगह पर पहले हरिहर मंदिर हुआ करता था। 24 नवंबर को सर्वे के दूसरे दौर के दौरान, विरोध कर रहे स्थानीय लोगों की सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प हो गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
 
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