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SC: तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश रद्द, शीर्ष अदालत ने कहा- निवारक हिरासत का उद्देश्य किसी को सजा देना नहीं

Sun, 24 Mar 2024 06:26 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 24 Mar 2024 06:26 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अपील खारिज कर दी थी। पीठ ने कहा कि निवारक हिरासत का आदेश केवल सार्वजनिक अव्यवस्था के मामले में दिया जा सकता है, कानून और व्यवस्था की समस्याओं के लिए नहीं।

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Supreme Court purpose preventive detention not to punish anyone
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

निवारक हिरासत को एक कठोर प्रावधान करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मनमाने और नियमित तरीके से इसे लागू करने के किसी भी कदम को शुरू में ही खत्म कर देना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि निवारक हिरासत का उद्देश्य किसी को सजा देना नहीं, बल्कि उसे गलती करने से रोकना है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

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हाईकोर्ट ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति की अपील खारिज कर दी थी। पीठ ने कहा कि निवारक हिरासत का आदेश केवल सार्वजनिक अव्यवस्था के मामले में दिया जा सकता है, कानून और व्यवस्था की समस्याओं के लिए नहीं। पीठ ने आगे कहा, कानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने में सरकार की अक्षमता इसे लागू करने का बहाना नहीं होनी चाहिए। इस सख्त उपाय को पहली उपलब्ध अवस्था में ही समाप्त किया जाना चाहिए।
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मौजूदा मामले में अपीलकर्ता को पिछले साल 12 सितंबर को तेलंगाना में राचाकोंडा पुलिस आयुक्त के आदेश पर तेलंगाना खतरनाक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1986 के तहत गिरफ्तार किया गया था। चार दिन बाद, तेलंगाना हाईकोर्ट ने हिरासत आदेश पर आदेश उठाने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी थी। ब्यूरो
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शक्ति का प्रयोग सावधानी से हो
शीर्ष अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा कि यह अच्छी तरह स्थापित कानून है कि निवारक हिरासत संबंधी किसी भी अधिनियम के तहत शक्ति का प्रयोग बहुत ही सावधानी और संयम के साथ किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि अभियोजन का लंबित रहना निवारक हिरासत के आदेश पर कोई बाधा नहीं है और निवारक हिरासत का आदेश भी अभियोजन पर बाधा नहीं है।

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