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सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, कहा- रवैया बदले

Tue, 04 Oct 2016 08:51 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Oct 2016 08:51 AM IST
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Supreme Court pulls up Centre, states on road safety
सड़क सुरक्षा
सड़क सुरक्षा पर केंद्र सरकार के प्रयासों को सुप्रीम कोर्ट ने ...चलता है... वाला रवैया करार दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा है कि वह दोषारोपण करना छोड़े और प्रभावी तरीके से काम करें। साथ ही अदालत ने सरकार से कहा कि वह सड़क दुर्घटना के उन पीड़ितों के बारे में भी सोचे जिन्हें यह भी नहीं पता कि इसके लिए मुआवजे का भी प्रावधान है। अदालत ने कहा कि हम जानना चाहते हैं इसे लेकर आप क्या करने जा रहे हैं। साथ ही अदालत ने इस संबंध में दाखिल हलफनामे को यह कहते हुए वापस कर दिया कि इसमें कुछ भी नहीं है। 
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सड़क सुरक्षा पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने सोमवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि पिछले दिनों सड़क परिवहन सचिव ने सभी राज्यों के परिवहन सचिवों की बैठक बुलाई थी। इसमें तीन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
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इस पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक में निचले स्तर के अधिकारी के शामिल होने से क्या होगा। क्या वे खुद कोई निर्णय ले सकते हैं। पीठ ने सवाल किया कि क्या आपने इस बारे में संवाद करने की कोशिश की कि बैठक में सचिव स्तर के अधिकारी क्यों नहीं शामिल हुए। पीठ ने कहा कि कल को कोई किसी चपरासी को बैठक में भेज दिया जाएगा, तब भी आप कुछ नहीं करेंगे।
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Supreme Court pulls up Centre, states on road safety
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पीठ ने कहा कि आखिर स्वास्थ्य सचिव का भी कोई सम्मान है। आप ऐसा नहीं कर सकते। पीठ ने मंत्रालय के प्रयासों को ...चलता है... वाला रैवया बताया। पीठ ने मंत्रालय से पूछा कि राज्यों ने कनिष्ठ अधिकारियों को बैठक के लिए भेजा तो आपने क्या किया, आप चुप क्यों रहें। न तो आपने बैठक में आपत्ति जताई और न ही बाद में। इस पर मंत्रालय ने कहा कि हमने आपत्ति जताई थी। मंत्रालय ने कहा कि उसे एक और मौका दिया जाए।

​मंत्रालय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने पीठ से इस संबंध में राज्यों को निर्देश देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हमारे हाथ बंधे हुए हैं। इस पर पीठ ने कहा कि तब आप यह क्यों नहीं कहते हैं कि आप असहाय हैं। पीठ ने कहा कि आप हमारे कंधे पर रखकर बंदूक न चलाएं। पीठ ने सरकार को इस संबंध में गंभीरता दिखाने की बात कहते हुए उसे चार हफ्ते का वक्त दिया है। सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि करीब 50 फीसदी से अधिक दुर्घटना पीड़ित मुआवजे का दावा नहीं करते। इस पर पीठ ने कहा कि संभवत: ये ऐसे गरीब लोग हैं, जिन्हें मुआवजे के बारे में पता न हो। पीठ ने सरकार को इस पर विचार करने के लिए कहा है।
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