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SC: उपभोक्ताओं को उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में जानने का अधिकार देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
Sun, 20 Jul 2025 01:56 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 20 Jul 2025 01:56 PM IST
सार
अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के लिए सूचित किए जाने और विकल्प चुनने और गलत व्यापार प्रथाओं और बेईमान शोषण से बचाने के लिए जानने का अधिकार महत्वपूर्ण है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता, उसकी शुद्धता और डिस्ट्रीब्यूटर्स और सेलर्स के बारे में जानने का अधिकार मिलना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को ये अधिकार मिलने के बाद वे गलत चीजों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकेंगे।
याचिका में की गई है ये मांग
इस याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है कि प्रत्येक वितरक, व्यापारी और दुकान मालिक प्रवेश द्वार पर पंजीकरण विवरण, जिसमें नाम, पता, फोन नंबर और कर्मचारियों की संख्या शामिल हो, लोगों को दिखाई देने वाले डिस्प्ले बोर्ड पर मोटे अक्षरों में प्रदर्शित करें। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ 21 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के लिए सूचित किए जाने और विकल्प चुनने और गलत व्यापार प्रथाओं और बेईमान शोषण से बचाने के लिए जानने का अधिकार महत्वपूर्ण है।
ये भी पढ़ें- All Party Meeting: संसद में हर सवाल का जवाब देगी सरकार, रिजिजू बोले- हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार
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'विवरण जानना आवश्यक'
याचिकाकर्ता का कहना है कि, 'जानने का अधिकार उपभोक्ताओं को धोखेबाज या भ्रामक वितरक, डीलर, व्यापारी, विक्रेता और दुकान मालिक को झांसे में आने से बचाता है, जो किसी उत्पाद/सेवा के बारे में गलत जानकारी दे सकते हैं या बिक्री, खरीद और पैसे के लेन-देन के बाद गायब हो सकते हैं। यदि किसी उपभोक्ता को किसी उत्पाद या सेवा से कोई समस्या है, तो शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता निवारण मंचों के माध्यम से समाधान पाने के लिए वितरक, डीलर और विक्रेता के बारे में विवरण जानना आवश्यक है।
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याचिका में की गई है ये मांग
इस याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है कि प्रत्येक वितरक, व्यापारी और दुकान मालिक प्रवेश द्वार पर पंजीकरण विवरण, जिसमें नाम, पता, फोन नंबर और कर्मचारियों की संख्या शामिल हो, लोगों को दिखाई देने वाले डिस्प्ले बोर्ड पर मोटे अक्षरों में प्रदर्शित करें। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ 21 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के लिए सूचित किए जाने और विकल्प चुनने और गलत व्यापार प्रथाओं और बेईमान शोषण से बचाने के लिए जानने का अधिकार महत्वपूर्ण है।
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'विवरण जानना आवश्यक'
याचिकाकर्ता का कहना है कि, 'जानने का अधिकार उपभोक्ताओं को धोखेबाज या भ्रामक वितरक, डीलर, व्यापारी, विक्रेता और दुकान मालिक को झांसे में आने से बचाता है, जो किसी उत्पाद/सेवा के बारे में गलत जानकारी दे सकते हैं या बिक्री, खरीद और पैसे के लेन-देन के बाद गायब हो सकते हैं। यदि किसी उपभोक्ता को किसी उत्पाद या सेवा से कोई समस्या है, तो शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता निवारण मंचों के माध्यम से समाधान पाने के लिए वितरक, डीलर और विक्रेता के बारे में विवरण जानना आवश्यक है।