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Supreme Court: सुब्रमण्यम स्वामी की राम-सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की याचिका पर 9 मार्च को होगी सुनवाई

Wed, 23 Feb 2022 02:19 PM IST
मेघा चौधरी न्यूज डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली Published by: मेघा चौधरी Updated Wed, 23 Feb 2022 02:19 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट बुधवार 9 मार्च को पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनावाई करेगा। इस पर पीठ ने कहा कि याचिका की 9 मार्च को सुनवाई की जाएगी। स्वामी की याचिका में केंद्र सरकार को राम-सेतु को राष्ट्रीय विरास्त घोषित करने का निर्देश देने की मांग है। 

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Supreme Court: Subramanian Swamy plea is going to hear on 9 march to declare ram-setu a national heritage
राम-सेतु - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट  9 मार्च को पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में केंद्र सरकार को राम-सेतु को राष्ट्रीय विरासत घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। स्वामी ने चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एएस भोपाना और हेमा कोहली की पीठ से कहा कि याचिका कई महीनों से सुनवाई के लिए नहीं आई है। इसको वाद सूची से नहीं हटाना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि याचिका की 9 मार्च को सुनवाई की जाएगी। स्वामी ने पीठ के समक्ष पिछले साल 8 अप्रैल को तत्काल सुनवाई के लिए अपनी याचिका का उल्लेख भी किया। इससे पहले 23 जनवरी 2020 को शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह स्वामी की इस याचिका पर तीन महीने बाद विचार करेगी।
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क्या है राम-सेतु
राम-सेतु को एडम ब्रिज (Adam’s bride) के नाम से भी जाना जाता है। यह चूना पत्थर की एक श्रृंखला है जो, तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर पंबन द्वीप, जिसे रामेश्वरम द्वीप के रूप में भी जाना जाता है और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच है। स्वामी ने कहा कि वह मुकदमे का पहला दौर जीत चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार ने राम-सेतु के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया था। 2017 में उनकी मांग पर विचार करने के लिए संबंधित केंद्रीय मंत्री ने बैठक भी बुलाई थी। लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ।
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स्वामी ने यूपीए-1 सरकार की ओर से शुरू की गई विवादास्पद सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ राम-सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा उठाया था।
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2007 में जब यह मामला शीर्ष अदालत में पहुंचा तो राम-सेतु के परियोजना के काम पर रोक लगा दी गई थी।  बाद में केंद्र ने कहा था कि उसने परियोजना के सामाजिक आर्थिक नुकसान पर विचार किया था और राम-सेतु को नुकसान पहुंचाए बिना ही शिपिंग चैनल परियोजना के लिए एक चैनल तलाशने के लिए तैयार था। कोर्ट ने बाद में सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
 
कुछ राजनीतिक दलों, हिंदू धार्मिक समूह और पर्यावरणविदों का सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना को विरोध का सामना भी करना पड़ा। मन्नार को पाक जलडमरूमध्य से जोड़ने के लिए परियोजना के तहत व्यापक ड्रेजिंग और चूना पत्थर के शोलों को हटा 83 किमी लंबा गहरा पानी का चैनल बनाना था।


जवाब दाखिल करने को केंद्र को दिया था 6 सप्ताह का समय
13 नवंबर 2019 को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को राम-सेतु पर अपना रुख स्पष्ट रखने को कहा था। इसके लिए केंद्र सरकार को 6 सप्ताह का समय दिया गया था। इसके साथ ही जवाब दाखिल न होने पर स्वामी को अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए छूट भी दे दी गई थी।
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