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Supreme Court: कोर्ट ने कहा- पेंशन एक सतत प्रक्रिया, देरी पर एरियर देने से मना नहीं कर सकते

Wed, 01 Jun 2022 09:49 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 01 Jun 2022 09:49 PM IST
सार

जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 20 मई के एक आदेश में कहा, हाईकोर्ट ने हालांकि माना है कि गोवा सरकार ने याचिकाकर्ताओं को 60 साल के बजाय 58 की उम्र में गलत तरीके से सेवानिवृत्त कर दिया।

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Supreme Court Pension is a continuous process cannot refuse to give arrears on delay Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेंशन एक सतत प्रक्रिया है, इसमें देरी की स्थिति में एरियर देने से इनकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट का बकाया पेंशन नहीं देने का आदेश खारिज कर दिया। 

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जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 20 मई के एक आदेश में कहा, हाईकोर्ट ने हालांकि माना है कि गोवा सरकार ने याचिकाकर्ताओं को 60 साल के बजाय 58 की उम्र में गलत तरीके से सेवानिवृत्त कर दिया। इसके बावजूद पेंशन बकाया रोकने का फैसला सुनाया। हाईकोर्ट का यह फैसला गलत है। 
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पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा संशोधित दरों पर बकाया पेंशन देने से मना करने और 1 जनवरी 2020 की दरों को ही लागू रखने का फैसला पूरी तरह निराधार है। यदि याचिकाकर्ता दो वर्ष तक सेवा में बने रहते तो हाईकोर्ट देरी के कारण वेतन रोकने का आदेश दे सकता था लेकिन जब बात पेंशन की हो तो उसे रोका नहीं जा सकता। 
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होमगार्ड को 9000 रुपये वेतन सिर्फ शोषण: सुप्रीम कोर्ट
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में होमगार्ड के बेहद कम वेतन पर नाखुशी जताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वेतन संशोधन पर विचार करे। जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्ना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि ओडिशा में होमगार्ड को हर महीने सिर्फ 9000 रुपये यानी रोजाना सिर्फ 300 रुपये दिए जाते हैं। 


पीठ ने यह भी पाया कि राज्य में पुलिस के एक सिपाही को हर महीने 21700 रुपये और उस पर महंगाई भत्ता दिया जाता है। होमगार्ड के कई जवान 15 वर्षों से नौकरी कर रहे हैं। पीठ ने कहा, इन्हें सिर्फ 9000 रुपये देना और कुछ नहीं, सिर्फ शोषण है। आखिर एक होमगार्ड सिर्फ 9000 में अपना और परिवार का गुजारा कैसे करेगा जबकि काम उससे करीब-करीब पुलिसकर्मी जितना ही लिया जाता है। ऐसे में ही राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि होमगार्ड के वेतन पर फिर विचार करे। 

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