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सुप्रीम कोर्ट : चेक बाउंस मामलों के लंबित रहने से कारोबारी सुगमता को हो रहा नुकसान, निवेश भी होता है कम 

Sat, 09 Oct 2021 04:16 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 09 Oct 2021 04:16 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कार्यवाही लंबे समय तक चलने पर चिंता जताते हुए कहा, निगोशिएबल इंस्ट्रमेंट्स (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत निहित इस अपराध की प्रकृति अर्ध आपराधिक है और इस कानून का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षा प्रदान करना है।

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Supreme Court: Pending check bounce cases, loss of ease of doing business, investment is also less
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, देश में चेक बाउंस के मामलों में कार्यवाही के लंबे समय तक लंबित रहने और शिकायतों की बहुलता से भारत में कारोबारी सुगमता को नुकसान हो रहा है। इससे निवेश भी कम होता है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही लंबे समय तक चलने पर जताई चिंता
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, निगोशिएबल इंस्ट्रमेंट्स (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत निहित इस अपराध की प्रकृति अर्ध आपराधिक है और इस कानून का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षा प्रदान करना है।
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दो याचिकाओं पर अपने 41 पन्ने के आदेश में पीठ ने कहा, वित्तमंत्रालय ने इन मुद्दों को स्वीकार करते हुए 8 जून, 2020 को एक नोटिस द्वारा देश में कारोबार की भावना को बेहतर बनाने के लिए एनआई अधिनियम की धारा 138 समेत छोटे अपराधों के अपराधीकरण के संबंध में टिप्पणियां मांगी हैं। इसके तहत पक्षकारों को विवाद निपटाने के लिए प्रेरित  किया जाता है। इससे लंबी कानूनी कार्यवाही से बचा जा सकता है।

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