एमबीबीएस कोर्स में विदेशी छात्रों के दाखिले के लिए 15 दिन पहले अनुमति देने के निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को होने वाली परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार को दिया निर्देश
- विदेशी और उत्तर पूर्व राज्यों के अभ्यर्थियों को अप्रूवल की जानकारी 15 दिन पहले
- प्रायोजितअभ्यर्थियों को होने वाली परेशानी दूर करने के लिए दिया गया यह आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में विदेशी और उत्तर पूर्व राज्यों के अभ्यर्थियों को अप्रूवल की जानकारी 15 दिन पहले देने का निर्देश दिया है। यह निर्देश प्रायोजित (स्पॉन्सर) अभ्यर्थियों को होने वाली परेशानी और अंतिम समय की हड़बड़ी को दूर करने के लिए दिया गया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने सालों से हो रही इस परेशानी को ध्यान में रखते सरकार को अप्रूवल की जानकारी हर वर्ष 15 अगस्त से पहले देने को कहा है।
साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आलोक रंजन बनाम केंद्र सरकार मामले में देश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त निर्धारित की थी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में दाखिले में सेंट्रल पूल के जरिए विभिन्न देशों, उत्तर पूर्व राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के छात्रों के लिए सीटें आवंटित होती हैं।
इस वर्ष मेडिकल कॉलेजों में इस कोटे के तहत सीटों के आवंटन की रूपरेखा 16 अगस्त को तैयार की गई। इसके बाद ईरान, नेपाल व भूटान और उत्तर पूर्व राज्यों ने प्रायोजित छात्रों की सूची तैयार की। विदेश मंत्रालय ने इन छात्रों को दाखिले को लेकर अपनी सहमति 30 अगस्त को दी। लिहाजा छात्र दाखिले के लिए कॉलेजों में एक व दो सितंबर को पहुंचे लेकिन उन्हें दाखिले देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त आखिरी तारीख तय कर रखी है।
दाखिला पाने में असफल छात्रों ने दायर की थी याचिका
दाखिला पाने में असफल रहे छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन छात्रों के पक्ष को सही ठहराते हुए आखिरी तारीख (31 अगस्त) में छूट प्रदान करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा कि आखिरी तारीख से पहले दाखिले के लिए न पहुंच पाने में इन छात्रों की कोई गलती नहीं है। दाखिले के बारे में जानकारी मिलते ही ये छात्र बिना किसी देरी से कॉलेज पहुंचे थे।
एम्स, दिल्ली की ओर से पेश वकील दुष्यंत पाराशर ने कहा कि आखिरी तारीख 31 अगस्त होने के कारण संस्थान ने इन छात्रों को दाखिला नहीं दिया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों को ऐसे छात्रों को सात अक्तूबर तक दाखिले देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पाया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी। लिहाजा इस परेशानी को सदा के लिए दूर करने के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसे छात्रों के दाखिले की अनुमति 15 दिन एडवांस में देने का निर्देश दिया है, जिससे छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।