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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: राजोआना की दया याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करे केंद्र 

Mon, 02 May 2022 09:27 PM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 02 May 2022 09:27 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को 2013 में राष्ट्रपति के समक्ष दायर दया याचिका पर कार्रवाई में देरी को गंभीरता से लेते हुए गृह मंत्रालय को 30 अप्रैल तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

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Supreme Court orders Center to decide on Rajoana's mercy petition within two months
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाले बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करे। केंद्र को इस तथ्य से प्रभावित हुए बिना निर्णय लेने के लिए कहा है कि हत्याकांड में अन्य दोषियों द्वारा दायर अपीलें लंबित हैं।

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गृह मंत्रालय को 30 अप्रैल तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को 2013 में राष्ट्रपति के समक्ष दायर दया याचिका पर कार्रवाई में देरी को गंभीरता से लेते हुए गृह मंत्रालय को 30 अप्रैल तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। जिसमें विफल रहने पर गृह सचिव और सीबीआई के निदेशक (अभियोजन) को दो मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
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30 अप्रैल को दायर हलफनामे में गृह मंत्रालय ने दो प्रारंभिक आपत्तियां जताई थीं। पहला यह है कि दया याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह किसी अन्य संगठन द्वारा दायर की गई है न कि दोषी द्वारा स्वयं। दूसरा यह है कि दया याचिका पर तब तक फैसला नहीं किया जा सकता जब तक कि मामले में अन्य दोषियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर अपीलों का निपटारा नहीं किया जाता है। मालूम हो कि रजोआना ने अपनी दोषसिद्धि या सजा को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती नहीं दी है।
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गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए तर्क को खारिज कर दिया
सोमवार को जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने गृह मंत्रालय द्वारा उठाए गए तर्क को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि हालांकि एक अन्य संगठन ने दया याचिका दायर की है लेकिन अथॉरिटी ने कई मौकों पर राजोआना को आधिकारिक संचार भेजा है कि मामला विचाराधीन है। साथ ही दोषी ने स्वयं अनुच्छेद-32 के तहत वर्तमान रिट याचिका दायर की है।


पीठ ने कहा कि यह तथ्य कि किसी अन्य संगठन ने दया याचिका दायर की है, मामले पर विचार करने में बाधा नहीं है। पीठ ने वर्ष 2020 के  सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सह-आरोपियों द्वारा अपीलों के लंबित होने के बावजूद मामले पर विचार किया जा सकता है। पीठ ने केंद्र सरकार से राजोआना की दया याचिका पर दो महीने में फैसला करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।

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