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Supreme Court: क्या विचाराधीन कैदी को वर्षों जेल में रखना सही? कोर्ट ने GST मामले में जमानत देकर कही ये बात

Tue, 13 Jan 2026 07:09 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 13 Jan 2026 07:09 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने जीएसटी मामले में आरोपी अमित मेहरा को जमानत देते हुए बातें कही। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं।

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Supreme Court on undertrial prisoner rights GST case bail judicial custody undertrial detention
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए जीएसटी से जुड़े एक मामले में आरोपी अमित मेहरा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और अब तक मुकदमे की शुरुआत भी नहीं हो पाई है, ऐसे में लगातार कारावास न्यायसंगत नहीं है।

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अमित मेहरा जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की ओर से दर्ज एक मामले में आरोपी हैं। उन पर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम और आईजीएसटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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कोर्ट ने जमानत क्यों जरूरी मानी?
जस्टिस जेपी पारदीवाला और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि अमित मेहरा आठ महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। अब तक न तो आरोप तय हुए हैं और न ही ट्रायल शुरू हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुकदमा जल्द शुरू भी हो जाए, तो उसके अगले एक साल में खत्म होने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में विचाराधीन कैदी को जेल में बनाए रखना अनुचित होगा।


अदालत ने किन बिंदुओं पर जोर दिया?

  • आरोपी आठ महीने से ज्यादा समय से हिरासत में है।
  • अभी तक मुकदमे की शुरुआत नहीं हुई है।
  • आरोप मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय हैं।
  • अधिकतम सजा पांच साल तक की है।
  • लंबे समय तक कैद व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन है।


जमानत पर क्या शर्तें होंगी?
सुप्रीम कोर्ट ने अमित मेहरा को निचली अदालत द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के तहत जमानत देने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जीएसटी विभाग अपने हितों की सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शर्त चाहता है, तो वह निचली अदालत के समक्ष आवेदन कर सकता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

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फैसले का क्या है व्यापक संदेश?
शीर्ष अदालत के इस फैसले को विचाराधीन कैदियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि जमानत नियम है और जेल अपवाद। केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अमित मेहरा की विशेष अनुमति याचिका और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।


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