{"_id":"644f8d44ae0d2b6f8301d5c4","slug":"supreme-court-on-sedition-ipc-section-124a-ag-tells-centre-re-examining-process-in-final-stage-2023-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: देशद्रोह को अपराध घोषित करने वाली धारा 124a की समीक्षा कर रही सरकार, जानिए क्या है मामला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: देशद्रोह को अपराध घोषित करने वाली धारा 124a की समीक्षा कर रही सरकार, जानिए क्या है मामला
Mon, 01 May 2023 03:44 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 01 May 2023 03:44 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में धारा 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गई हैं। अटॉर्नी जनरल का पक्ष जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई अगस्त तक के लिए टाल दी है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशद्रोह को अपराध बनाने वाली आईपीसी की धारा 124ए की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 124ए की समीक्षा पर चर्चा अंतिम चरण में है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में धारा 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गई हैं। अटॉर्नी जनरल का पक्ष जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई अगस्त तक के लिए टाल दी है।
विज्ञापन
क्या है आईपीसी की धारा 124ए?
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए के अनुसार, देशद्रोह एक प्रकार का अपराध है। धारा 124ए देशद्रोह को एक ऐसे अपराध के रूप में परिभाषित करती है, जिसमें कोई व्यक्ति भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ मौखिक, लिखित, संकेतों या दृश्य रूप में घृणा या अवमानना करता है। इस अपराध में तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है। इस कानून के तहत आरोपित व्यक्ति को सरकारी नौकरी करने से रोका जा सकता है। साथ ही आरोपित को पासपोर्ट रखने की भी अनुमति नहीं होती और उसे समय समय पर न्यायालय में पेश होना पड़ता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Supreme Court: बढ़ सकती हैं बाहुबली की दिक्कतें, आनंद मोहन मामले पर आठ मई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
विज्ञापन
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से देशद्रोह की सीमा परिभाषित करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने आलोचकों, पत्रकारों, सोशल मीडिया यूजर्स और नागरिकों के खिलाफ देशद्रोह कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जाहिर की है।
बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि नई प्राथमिकी दर्ज करने के अलावा, इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच समेत सभी कार्यवाही पर रोक रहेगी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आईपीसी की धारा 124ए की कठोरता वर्तमान सामाजिक परिवेश के अनुरूप नहीं है। पीठ ने कहा कि जब तक इस कानून के प्रावधानों की जांच पूरी नहीं होती, तब तक कानून के प्रावधानों का उपयोग जारी रखना ठीक नहीं होगा।