फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court on Medical Negligence case and principles of Res Ipsa Loquitur

SC: 'रेस इप्सा लोकुटर' सिद्धांत के लिए 'रेस' का होना जरूरी, अदालत ने मेडिकल लापरवाही मामले में की टिप्पणी

Tue, 24 Oct 2023 05:36 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 24 Oct 2023 05:36 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने एक महिला को राहत नहीं देने वाले उपभोक्ता आयोग के एक फैसले को बरकरार रखते हुए आदेश में कहा कि ‘रेस इप्सा लोकुटर’ सिद्धांत वहां लागू होता है जहां परिस्थितियां यह संकेत करती हैं कि जिस पर आरोप लगा है उसने लापरवाही बरती है। 

विज्ञापन
Supreme Court on Medical Negligence case and principles of Res Ipsa Loquitur
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘रेस इप्सा लोकुटर’ के सिद्धांतों को लागू करने के लिए यह जरूरी है कि चिकित्सीय लापरवाही के आरोप को स्थापित करने के लिए ‘रेस’ मौजूद हो। अगर मरीजों को होने वाली जटिलताएं चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़ी नहीं हैं तो लापरवाही का कोई मामला नहीं बनता है। ‘रेस इप्सा लोकुटर’ एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है ‘चीज स्वयं बोलती है’।

विज्ञापन


जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने एक महिला को राहत नहीं देने वाले उपभोक्ता आयोग के एक फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने आदेश में कहा कि ‘रेस इप्सा लोकुटर’ सिद्धांत वहां लागू होता है जहां परिस्थितियां यह संकेत करती हैं कि जिस पर आरोप लगा है उसने लापरवाही बरती है। इस सिद्धांत को साबित करने के लिए ठोस परिस्थितिजन्य या दस्तावेजी साक्ष्य होना बहुत जरूरी है।
विज्ञापन


आईसीयू में नहीं भेजा
अपीलकर्ता ने कहा कि उसके प्रति की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई, जबकि उन्हें दिल से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी। महिला के वकील ने बताया कि भर्ती के समय सूचित किया गया था कि सर्जरी के बाद उन्हें आईसीयू में स्थानांतरित किया जाएगा, लेकिन उन्हें रिकवरी रूम से सीधे एक निजी कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। अस्पताल के वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि मरीज ने न्यूरोसर्जरी के बाद बहुत अच्छी रिकवरी की थी और पोस्टऑपरेटिव जटिलताएं नहीं थीं, इसलिए उसे रिकवरी रूम में स्थानांतरित कर दिया गया और उसके बाद एक निजी कमरे में ले जाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अस्पताल पर लगाया था आरोप
पीठ एक महिला याचिकाकर्ता की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसके पति की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई। महिला ने आरोप लगाया था कि अस्पताल ने उसके पति को प्राइवेट रूम में शिफ्ट करने से लेकर दिल का दौरा पड़ने तक उसकी उचित देखभाल नहीं की। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग ने तीन अगस्त 2010 के फैसले में महिला को कोई राहत देने से इन्कार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता इस बात का कोई कोई ठोस सबूत या सामग्री पेश करने में नाकाम रही कि उसके पति को ऑपरेशन से या किसी चिकित्सीय कमी के कारण दिल का दौरा पड़ा था। महिला ने उपभोक्ता आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed