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कोरोना का खौफ : सुप्रीम कोर्ट ने कहा-सात साल से जेल में बंद कैदियों को दी जा सकती है पैरोल

Tue, 24 Mar 2020 02:03 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 24 Mar 2020 02:03 AM IST
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Supreme court on coronavirus, Parole can be given to inmates jailed for seven years
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

देश की भीड़-भाड़ वाली जेलों में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जिन कैदियों को किसी मामले में सात साल या उससे कम की सजा दी गई है और वे जेल में बंद हैं। ऐसे में उन्हें पैरोल या अंतरिम जमानत दी जा सकती है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने यहां एक उच्चस्तरीय समिति बना कर फैसला लें कि किन सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों को फिलहाल कुछ समय के लिए रिहा किया जा सकता है।

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कोर्ट का सुझाव था कि सात साल से कम की सजा पाए या छोटे अपराधों में मुकदमे का सामना कर रहे कैदियों को छह हफ्ते के लिए परोल दे देना बेहतर रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये सुनिश्चित करना सबका कर्तव्य है कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए जेलों में स्वास्थ्य सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएं। कोर्ट ने कहा, कोरोना वायरस के फैलने को जहां तक नियंत्रित रखा जा सकता है, उसके लिए सभी मुमकिन उपाय किए जाने चाहिए।
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इस संबंध में सभी राज्यों ने अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं जिनका न्याय मिश्र और सॉलिसिटर जनरल निरीक्षण कर रहे हैं। हर राज्य ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या को देखने के लिए तैयार रहने की इच्छा जताई है।

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 समिति ही बनाएगी कैदियों की श्रेणियां

उच्चस्तरीय समिति ही तय करेगी कि किन कैदियों को पेरोल दी जा सकती है और किसे नहीं। ये समिति कैदियों की श्रेणी बनाएंगी और उनके अपराध और व्यवहार के आधार पर यह तय होगा कि किस किसको अंतरिम जमानत या पैरोल दी जा सकती है। इस समिति में कानून सचिव और स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन भी होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम सरकार के कदमों से संतुष्ट, आलोचकों ने भी माना

कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सरकार की तारीफ की है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने कहा, हम सरकार के कदमों से संतुष्ट हैं। मामले से निपटने के लिए काफी तेजी से कदम उठाए गए। आलोचक भी मान रहे हैं कि सरकार ने ठीक काम किया। 

यह राजनीति नहीं तथ्य है। कोरोना से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही गई। याचिका में मांग उठी थी कि कोरोना से निपटने के लिए सरकार को और जरूरी कदम उठाने के लिए कहा जाए।

कोविड 19 टेस्ट करनेवाली लैब को बढ़ाने की मांग भी की गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कोरोना लैब टेस्टिंग सेंटर बढ़ाने की वाली याचिका सरकार को रेफर की।

दिल्ली सरकार कैदियों को देगी विशेष पैरोल

आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को सोमवार को बताया कि उसने कोरोना वायरस के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए कैदियों की संख्या घटाने का फैसला किया है। दोषियों को विशेष पैरोल और फरलो का विकल्प उपलब्ध कराकर सरकार अपनी जेलों से कैदियों की संख्या घटाएगी।

दिल्ली सरकार ने जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ को बताया कि वह विशेष पैरोल और फरलो देने के विकल्पों के लिए अपने जेल नियमों में संशोधन करेगी। एक दिन के भीतर अधिसूचना जारी की जाएगी।

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