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दागी नेताओं पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस

Fri, 22 Jul 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 Jul 2016 10:16 PM IST
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Supreme Court notice to Centre and EC
सुप्रीम कोर्ट

दोषी साबित होने पर तत्काल प्रभाव से सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराए जाने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया है। शीर्ष अदालत ने पूछा है कि दोषी ठहराए जाने के बाद सांसद या विधायक को सीधे अयोग्य क्यों नहीं ठहराया जाता, उसके लिए सचिवालय द्वारा अधिसूचना जारी करने की क्या आवश्यकता है।

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार और चुनाव आयोग से पूछा है कि जब शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कह रखा है कि आपराधिक मामले में अगर किसी विधायक या सांसद को दोषी ठहराने के बाद स्वत: वह अयोग्य हो जाएंगे, ऐसे में सचिवालय के द्वारा उनकी अयोग्यता पर मुहर लगाने के लिए अधिसूचना जारी करने की क्या आवश्यकता है?
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अदालत लोक प्रहरी नामक गैर सरकारी संगठन और वकील लिली थॉमस की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में यह शिकायत की गई है कि 2013 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश में सही तरीके से अमल नहीं किया जा रहा है।
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जिसमें कहा गया था कि अगर किसी सांसद या विधायक को उस अपराध में दोषी ठहराया जाता है अगर उसमें दो वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान है, तो वह स्वत: ही अयोग्य हो जाएगा।

अध्यक्ष एसएन शुक्ला ने पीठ के समक्ष कहा

Supreme Court notice to Centre and EC
भारतीय निर्वाचन आयोग

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से उसके अध्यक्ष एसएन शुक्ला ने पीठ के समक्ष कहा कि संसदीय सचिवालय और विधानसभा सचिवालय द्वारा अधिसूचना जारी करने में देरी का विधायक या संसद फायदा उठा ले जाते है, उन्हें उच्च अदालतों से दोषसिद्धि पर रोक लगवाने का वक्त मिल जाता है। 

जिस कारण सुप्रीम कोर्ट का फैसला असरदार साबित नहीं हो पा रहा है। आदेश का मकसद ही पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने गुहार की कि दोषी ठहराए गए सांसद या विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का क्लीयर-कट तरीका होना चाहिए। जिस पर पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग का जवाब आने दीजिए, हम देखते है कि क्या किया जा सकता है। 

मालूम हो कि जुलाई 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने जन प्रतिनिधि कानून की धारा-8(4) को निरस्त करते हुए कहा था कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए सांसद या विधायक तत्काल अयोग्य हो जाएंगे।

धारा-8(4) दोषी ठहराए गए सांसद या विधायक को तीन महीने के भीतर ऊपरी अचदालत में अपील करने की छूट प्रदान करता था और अपील लंबित होने के आधार पर उन्हें अयोग्यता बची रहती थी।

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