SC: बंगाल के कर्मचारियों को 25 प्रतिशत डीए देने का आदेश, विजय शाह की याचिका पर सुनवाई 19 मई तक स्थगित
राज्य के कुछ कर्मचारियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डीए को केंद्र सरकार के बराबर करने की मांग की और लंबित डीए को भी क्लीयर करने की मांग की। इस पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कर्मचारियों को 31 प्रतिशत डीए देने का आदेश दिया।
विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को 18 प्रतिशत डीए मिलता है। इस साल अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डीए में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का एलान किया। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है। राज्य के कुछ कर्मचारियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डीए को केंद्र सरकार के बराबर करने की मांग की और लंबित डीए को भी क्लीयर करने की मांग की। इस पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कर्मचारियों को 31 प्रतिशत डीए देने का आदेश दिया। बंगाल सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि उच्च न्यायालय के आदेश में कोई गलती नहीं थी और सरकार को राज्य कर्मचारियों को 25 प्रतिशत डीए देने का आदेश दिया।
विजय शाह की याचिका पर सुनवाई 19 मई तक स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 19 मई तक स्थगित कर दी है। शाह ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के स्वत: संज्ञान वाले आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। कुरैशी ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के बारे में मीडिया को जानकारी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 38 रोहिंग्या शरणार्थियों के निर्वासन को लेकर दायर याचिका पर की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका की सुनवाई की, जिसमें 38 रोहिंग्या शरणार्थियों के निर्वासन को लेकर शिकायत की गई थी। आरोप था कि भारत सरकार ने उन्हें अंडमान भेजा और फिर समुद्र में फेंक दिया। याचिकाकर्ता के वकील की दलील को सुनने के बाद जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को एक और मामले के साथ जोड़ दिया, जो रोहिंग्याओं के मामले से संबंधित है। इस मामले पर 31 जुलाई 2025 को तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिका में इस दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं है, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्याओं को निर्वासित किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने वकील से कहा, जब देश इतनी कठिन स्थिति से गुजर रहा है, तो आप ऐसे अजीब दावे क्यों कर रहे हैं?कोर्ट ने आगे कहा, जब तक आरोपों का समर्थन कुछ प्रारंभिक सामग्री से नहीं होती, तब तक तीन जजों की बेंच के लिए फैसले पर विचार करना मुश्किल है।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया की याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। चौरसिया ने भ्रष्टाचार के एक मामले में नियमित जमानत देने से इनकार करने के छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। जस्टिस सूर् यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 22 मई को तय की है।
प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना मौलिक अधिकार का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार मौलिक अधिकार का हिस्सा है। इस टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने केंद्र के उस कार्यालय ज्ञापन को खारिज कर दिया, जिसमें मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने की अनुमति दी गई थी।
जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने वनशक्ति संगठन की याचिका पर दिए गए फैसले में कहा, पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक के समान ही केंद्र सरकार का भी सांविधानिक दायित्व है। अदालत ने कहा कि उसे केंद्र सरकार के उस प्रयास पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जो कानून के तहत पूरी तरह से प्रतिबंधित है। पीठ ने कहा, चतुराई से, पूर्वव्यापी प्रभाव शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है, लेकिन इसका प्रयोग किए बिना भी, प्रभावी रूप से पूर्वव्यापी प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी देने का प्रावधान है। 2021 का कार्यालय ज्ञापन इस अदालत के निर्णयों का उल्लंघन करते हुए जारी किया गया है। इसलिए, पीठ ने 2021 के कार्यालय ज्ञापन (ओएम) और संबंधित परिपत्रों को मनमाना, अवैध और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के विपरीत घोषित किया। पीठ ने केंद्र को
किसी भी रूप या तरीके से पूर्वव्यापी मंजूरी देने या ईआईए अधिसूचना के उल्लंघन में किए गए कार्यों को नियमित करने के लिए निर्देश जारी करने से रोक दिया गया।