SC: विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार का मामला; सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बंगाल-केरल के राज्यपालों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार करने के खिलाफ राज्यों की याचिकाओं पर केंद्र, पश्चिम बंगाल और केरल के राज्यपालों और सचिवों से जवाब मांगा है।
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बंगाल सरकार ने भी लगाए आरोप
पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और जयदीप गुप्ता ने कहा कि जब भी मामला सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होता है, राज्यपाल कार्यालय विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेज देता है। राज्य सरकारों ने राज्यपालों द्वारा कई विधेयकों को मंजूरी देने में की जा रही कथित देरी पर चिंता जताई। यह विवाद राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल द्वारा मंजूरी न दिए जाने से जुड़ा है। राज्य सरकारों का आरोप है कि राज्यपाल इन विधेयकों पर अपनी सहमति नहीं दे रहे हैं, जिससे जनता को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाए गए अहम विधायी उपायों में देरी हो रही है। राज्य सरकारों की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल कार्यालयों और केंद्र को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा लिखे गए लंबे फैसले पर नाराजगी जताई है। यह फैसला कलानिधि मारन और स्पाइसजेट से जुड़ा था। शीर्ष अदालत ने कहा कि फैसला सोच-समझकर नहीं लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है। उच्च न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई भी फैसला सावधानी पूर्वक तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, न्यायाधीशों को चुनौती के आधारों का भी ध्यान देने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का पात्रता मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में निचली न्यायिक सेवा के लिए पात्रता मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में निचली न्यायिक सेवा के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को एलएलबी परीक्षा में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। अदालत में इसे लेकर याचिका दायर की गई थी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पादरीवाला की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा, ‘इस पात्रता का उद्देश्य यह है कि न्यायिक सेवा में बेहतर लोगों की नियुक्ति हो। अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पात्रता निर्धारित की गई है।’