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SC: दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम की जमानत पर जल्द फैसला लेने का निर्देश; पूर्व सीएम मधु कोड़ा को झटका

Fri, 25 Oct 2024 02:24 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 25 Oct 2024 02:24 PM IST
सार

याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 21(2) के अनुसार, हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर अपील पर निर्णय लेना चाहिए। दवे ने कहा कि जमानत खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली इमाम की अपील 29 अप्रैल, 2022 को दायर की गई थी। इसे 64 बार स्थगित किया गया।

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supreme court news updates amandeep dhall gets bail in delhi excise policy case madhu koda
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार शरजील इमाम की जमानत याचिका पर जल्द फैसला लेने को कहा है। शरजील इमाम की जमानत याचिका अप्रैल 2022 से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने इमाम द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार करते हुए हाईकोर्ट को उसकी जमानत के मामले पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश देने को कहा। 
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याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 21(2) के अनुसार, हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर अपील पर निर्णय लेना चाहिए। दवे ने कहा कि जमानत खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली इमाम की अपील 29 अप्रैल, 2022 को दायर की गई थी। इसे 64 बार स्थगित किया गया।
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दिल्ली शराब नीति में व्यवसायी अमनदीप सिंह ढल को जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में कारोबारी अमनदीप सिंह ढल्ल को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि ढल्ल एक साल से अधिक समय से जेल में हैं और मुकदमा जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने ब्रिंडको सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक दल्ल को राहत देते हुए कहा कि सीबीआई को मामले में करीब 300 गवाहों से पूछताछ करनी है और मामले की सुनवाई अभी शुरू होनी है। पीठ ने कहा कि ढल्ल 500 दिनों से अधिक समय से जेल में बंद हैं तथा उन्हें और हिरासत में रखने से कोई फायदा नहीं होगा। पीठ ने साफ किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कुछ नहीं कहा है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत उन शर्तों के अधीन है जो ट्रायल कोर्ट की ओर से तय की जाएंगी। ढल्ल को शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जमानत मिल चुकी है। ढल्ल ने दिल्ली हाइकोर्ट के 4 जून, 2024 के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें सीबीआई के मामले में उन्हें नियमित जमानत देने से इन्कार कर दिया गया था। उन्हें पिछले साल अप्रैल में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

कोयला घोटाला: पूर्व सीएम मधु कोड़ा को झटका

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कोयला घोटाला मामले में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया था ताकि वह आगामी राज्य विधानसभा चुनाव लड़ सकें। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 18 अक्टूबर के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। उनकी यह दोषसिद्धि 2017 में हुई थी। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में क्रमशः 13 नवंबर और 20 नवंबर को होगा और मतों की गिनती 23 नवंबर को होगी।

13 दिसंबर, 2017 को कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए के बसु और कोड़ा के करीबी सहयोगी विजय जोशी को राज्य में राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को कोलकाता की कंपनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के लिए एक निचली अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुनायी थी। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन काल के कोयला घोटाले में वीआईएसयूएल, कोड़ा और गुप्ता पर क्रमश: 50 लाख, 25 लाख और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। बसु पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि, दोषियों को उनकी अपील लंबित रहने के दौरान जमानत दे दी गई थी।
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नीट-पीजी : उत्तर कुंजी, प्रश्नपत्र खुलासे की मांग वाली याचिकाओं पर होगी सुप्रीम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 11 अगस्त को आयोजित नीट-पीजी 2024 की उत्तर कुंजी, प्रश्न पत्रों का खुलासा करने की मांग वाली याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करेगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष कुछ छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रही अधिवक्ता तन्वी दुबे ने कहा कि सूचना ज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया और परीक्षा कैसे आयोजित की गई, इस पर कोई मानक संचालन प्रक्रिया भी नहीं है। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर राज्य भी असमंजस में हैं। पीठ ने मामले को ‘गैर-विविध दिन’ पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

बालाजी को मिली सुप्रीम जमानत के खिलाफ याचिका, खुली अदालत में सुनवाई की मांग

तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी को नौकरी के बदले नकदी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई। शिकायतकर्ताओं के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई करने का निर्देश देने का आग्रह किया।
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